छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक फेरबदल: 23 अधिकारियों के तबादले, 12 ज़िलों में महिला कलेक्टर पदस्थ

छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक तंत्र में फेरबदल करते हुए 22 भारतीय प्रशासनिक सेवा और एक भारतीय वन सेवा के अधिकारी का नया पदस्थापना आदेश जारी किया है। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, राज्य के छह ज़िलों में कलेक्टर बदले गए हैं। इस नई व्यवस्था के बाद प्रदेश के कुल 33 ज़िलों में से 12 ज़िलों के कलेक्टर पद की ज़िम्मेदारी महिला आईएएस अधिकारियों को मिल गई है। इनमें सक्ती, कबीरधाम और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी समेत कई ज़िलों की प्रशासनिक कमान महिला अधिकारियों को सौंपी गई है।
सचिवालय स्तर पर सबसे बड़ा दायित्व परिवर्तन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में हुआ है। वर्ष 1999 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सोनमणि बोरा को इस विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही वे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। इससे पहले वे आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव पद पर कार्यरत थे। नगरीय निकायों के कामकाज और शहरों के विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिहाज़ से इस विभाग का दायित्व अहम माना जाता है। इसी विभाग की सचिव रहीं वर्ष 2005 बैच की आईएएस अधिकारी आर. संगीता को यहाँ से हटाकर मंत्रालय में सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है।
ज़िला स्तर के बदलावों के तहत वर्ष 2012 बैच के आईएएस रणबीर शर्मा को संचालक, समाज कल्याण के पद से हटाकर गरियाबंद का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। इस आदेश के बाद उनकी मैदानी प्रशासनिक भूमिका में वापसी हुई है। वहीं गरियाबंद के पूर्व कलेक्टर भगवान सिंह उइके को मंत्रालय में सामान्य प्रशासन विभाग का संयुक्त सचिव बनाया गया है। इसके अतिरिक्त कबीरधाम के कलेक्टर पद पर रहे गोपाल वर्मा को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में संयुक्त सचिव पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासनिक फेरबदल में वर्ष 2006 बैच के आईएफएस अधिकारी विवेक आचार्य की सेवाएँ छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक पद से हटाकर मूल वन विभाग को वापस कर दी गई हैं। इससे करीब तीन महीने पहले उन्हें संस्कृति विभाग के संचालक पद से स्थानांतरित कर पर्यटन मंडल भेजा गया था। नए आदेश के प्रभावी होने से वे तीन माह के भीतर ही संस्कृति और पर्यटन दोनों ही विभागों से अलग हो गए हैं।