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छत्तीसगढ़ में बिना जनहानि वाले नक्सल मामलों की विधिक समीक्षा, योग्य बंदियों के केस वापस लेने की तैयारी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Dvellakat / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ शासन ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े कम गंभीर मुकदमों में जेलों में बंद लोगों की विधिक समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करके केवल ऐसे मामलों को वापस लेने पर विचार होगा, जिनमें किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।

गृह विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। शासन के निर्देशानुसार विधि विभाग के समन्वय से अभियोजन अधिकारियों और शासकीय वकीलों का एक विशेष दल गठित होगा। यह दल मुकदमों की बारीकी से पड़ताल करेगा और पात्र पाए जाने पर प्रकरण वापसी की अनुशंसा करेगा। इसके अतिरिक्त, विचाराधीन बंदियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी सरकारी अधिवक्ताओं की सेवाएं ली जाएंगी।

प्रशासनिक स्तर पर तय व्यवस्था के तहत इस पूरी कवायद की साप्ताहिक समीक्षा संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की जाएगी। गृह मंत्री के अनुसार पुराने मामलों में करीब 1300 लोग कारागारों में निरुद्ध हैं। इन सभी मुकदमों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा रहा है, जिसमें जनहानि वाले और बिना जनहानि वाले प्रकरणों को अलग करके विधिक परीक्षण किया जा रहा है।

शासन ने पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे अंचलों में निर्माण कार्यों की गति तेज करने की भी योजना बनाई है। इसके अंतर्गत खुद को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित करने का औपचारिक प्रस्ताव पारित करने वाली प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में ऐसे 50 गांवों की पहचान की गई है, जिनमें सुकमा और बीजापुर से 20-20 तथा नारायणपुर से 10 गांव शामिल हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वर्ष 31 मार्च को राज्य को हथियारबंद नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया गया था। शासन ने आगामी 15 अगस्त को सभी चिन्हित नक्सल मुक्त गांवों में तिरंगा यात्रा आयोजित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए हैं।

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