छत्तीसगढ़ में मानसून के आने की उम्मीद, किसानों को राहत की आस

मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ में मानसूनी बादलों के जल्द पहुंचने की संभावना जताई है। रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी एचपी चंद्रा के अनुसार परिस्थितियां सामान्य रहीं तो मानसूनी बादल पहले जगदलपुर और बाद में रायपुर तथा अम्बिकापुर की ओर बढ़ेंगे। इस संभावित आगमन से खरीफ सीजन की बोआई में जुटे किसानों को राहत मिलने की आस है।
मानसून की देरी का सीधा असर खरीफ सीजन की बोआई पर पड़ा है। प्रदेश में 57 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती होती है, जिसमें धान का रकबा 35 लाख हेक्टेयर से ऊपर रहा है। पिछले खरीफ सीजन में 27 लाख 61 हजार 871 हेक्टेयर रकबे का किसानों ने समितियों में पंजीयन कराया था — यह वह रकबा था जिसकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद केंद्रों को बेची जानी थी। कृषि विभाग के अनुसार इस बार खरीफ बोनी का दायरा बढ़ने की संभावना है और उसमें बड़ा हिस्सा धान का रहेगा।
मानसून की सुस्त चाल के चलते खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही थी, जिससे बोआई का कार्यक्रम टलता रहा। इसके अलावा अप्रैल-मई में हुई छिटपुट बारिश ने एक अलग समस्या खड़ी कर दी — किसानों ने अकरस जुताई करा ली थी, लेकिन बेमौसम बारिश से मिट्टी पूरी तरह सूख नहीं पाई और खरपतवार नियंत्रण अधूरा रह गया। इससे किसानों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ा।
एचपी चंद्रा के अनुसार अभी प्रदेश के कई हिस्सों में जो छिटपुट बारिश हो रही है, वह स्थानीय चक्रवाती हवाओं और द्रोणिका के कारण है — यह दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा नहीं है। मानसूनी बादल देर तक टिके रहते हैं और उनसे निरंतर वर्षा होती है, जो फसलों के लिए ज़्यादा लाभकारी मानी जाती है।
मौसम विज्ञानियों ने किसानों को सलाह दी है कि बोआई का निर्णय मौसम पूर्वानुमान देखकर करें। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक जोखिम न लें।
एक फसली क्षेत्रों में अच्छी और निरंतर वर्षा ही बेहतर पैदावार की बुनियाद मानी जाती है। ऐसे में मानसून का समय पर और सामान्य रहना इस खरीफ सीजन के लिए निर्णायक होगा।