छत्तीसगढ़ में शैक्षणिक संस्थानों और जर्जर इमारतों का होगा सुरक्षा ऑडिट, मुख्यमंत्री ने दिए कड़े निर्देश

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के समस्त छात्रावासों, पीजी आवासों, कोचिंग संस्थानों, स्कूलों तथा प्रमुख शैक्षणिक परिसरों का फौरी सुरक्षा ऑडिट कराने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने शासकीय आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए संभागीय आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पड़ताल में किसी भी प्रकार की शिथिलता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों पर सीधी जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
शासकीय विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि प्रशासनिक तंत्र का दायित्व केवल हादसों के उपरांत हरकत में आने तक सीमित नहीं है, बल्कि भावी संकटों की समय पूर्व पहचान कर उनका निवारण करना भी अनिवार्य कर्तव्य है। उन्होंने अमले को सचेत किया कि किसी दुर्घटना की प्रतीक्षा किए बिना विद्यालयों, वाचनालयों, छात्रावासों तथा आमजन की आवाजाही वाले सार्वजनिक परिसरों की भौतिक स्थिति का तत्काल तकनीकी मूल्यांकन किया जाए। जहां भी जानमाल के नुकसान का अंदेशा हो, वहां निर्धारित समयावधि में सुधारात्मक कार्य पूरे किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह प्रशासनिक कदम देश की राजधानी के सत्य निकेतन क्षेत्र में छह सितंबर को घटी पांच मंजिला भवन दुर्घटना के दृष्टिगत उठाया गया है, जिसमें जान गंवाने वाले सात व्यक्तियों में दुर्ग ज़िले का एक बीस वर्षीय छात्र भी शामिल था। राज्य भर में बस्तर संभाग के दूरदराज इलाकों से लेकर रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर ज़िलों तक साढ़े तीन हज़ार से अधिक स्कूल भवन अत्यंत खस्ताहाल श्रेणी में दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में संचालित लगभग ढाई से तीन हज़ार निजी पीजी व एक हज़ार से अधिक कोचिंग सेंटरों में से आधे से अधिक के पास संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र और अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र तक उपलब्ध नहीं हैं।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग, पुलिस बल और ज़िला प्रशासन को अवैध व मिलावटी मदिरा के समूचे तंत्र पर नकेल कसने हेतु साझा छापेमारी अभियान संचालित करने के निर्देश भी दिए। इसके तहत सीमावर्ती इलाकों में अंतरराज्यीय अवैध शराब की आवक रोकने के लिए निगरानी कड़ी करने और अवैध निर्माण, भंडारण व वितरण में संलिप्त कारोबारियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।