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छत्तीसगढ़: सूखे खेत, महंगे आदान और 26 करोड़ का बर्बाद धान — किसान तीन मोर्चों पर घिरे

छत्तीसगढ़ में इस वर्ष 1 जून से अब तक सामान्यतः 108 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, किंतु केवल लगभग 33 मिलीमीटर दर्ज हुई — सामान्य से करीब 69 प्रतिशत कम। इस कमी के कारण धान के खेत सूखे पड़े हैं और खरीफ बुआई लड़खड़ा रही है।

सूखे के साथ-साथ कृषि आदानों की कीमतें भी किसानों पर भारी पड़ रही हैं। यूरिया जो पहले करीब 400 रुपये में मिलता था, वह अब 600 से 800 रुपये तक बिक रहा है। LAMPS सहकारी समितियों पर भी इसकी उपलब्धता घट गई है। डीएपी खाद, जो पहले लगभग 1,300 रुपये की थी, अब 2,000 से 2,200 रुपये के बीच है। बीज सहित अन्य कृषि सामग्री के दाम भी बढ़े हैं, जबकि धान का समर्थन मूल्य उस अनुपात में नहीं बढ़ा है।

इन दो संकटों के बीच राज्य के सरकारी संग्रहण केंद्रों पर धान की बर्बादी का तीसरा मोर्चा भी सामने आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान विभिन्न ज़िलों में कुल मिलाकर करीब 26 करोड़ रुपये का धान नष्ट हो चुका है।

गौरेला पेंड्रा मरवाही ज़िले के पेंड्रारोड संग्रहण केंद्र में खुले में रखे जाने से नमी और बारिश के कारण लगभग 20,000 क्विंटल धान सड़ गया, जिससे अनुमानित 6 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान बताया जा रहा है। जिला विपणन अधिकारी हरीश शर्मा के अनुसार इसमें से करीब 16,000 क्विंटल का डिलीवरी ऑर्डर कट चुका है और राइस मिलर्स उठाव को तैयार हैं — हालाँकि यह दावा सरकारी स्तर का है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।

कवर्धा ज़िले के चारभांठा और बघर्रा केंद्रों पर 26,000 क्विंटल धान का शॉर्टेज मिला, जिसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपये आंकी गई। जाँच में फर्जी एंट्री, फर्जी बिल और CCTV से छेड़छाड़ जैसी गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं और केंद्र प्रभारी प्रीतेश पांडे को हटाया गया।

जशपुर ज़िले के कोनपारा उपकेंद्र से 20,586 क्विंटल धान गायब पाया गया — अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी के निरीक्षण में यह गड़बड़ी उजागर हुई और करीब 6 करोड़ 55 लाख रुपये की आर्थिक अनियमितता दर्ज की गई।

महासमुंद ज़िले के पाँच संग्रहण केंद्रों में लगभग साढ़े पाँच करोड़ रुपये का धान सूख कर नष्ट हुआ। रायपुर ज़िले के आरंग विकासखंड के भलेरा केंद्र से एक और मामला सामने आया जहाँ एक कर्मचारी को सूखे धान पर पानी डालते वीडियो में देखा गया — संभवतः वजन बढ़ाने के इरादे से। अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने बताया कि चार कर्मचारियों — विष्णु साहू, उमेश कुमार साहू, इन्द्रमान निषाद और जितेन्द्र साहू — की सेवाएँ तत्काल समाप्त कर दी गईं और आवश्यकता पड़ने पर FIR की भी बात कही गई।

एक ओर आसमान से पानी नहीं बरस रहा, दूसरी ओर खाद-बीज के दाम आसमान पर हैं और तीसरी ओर पिछले सीजन में खरीदा गया धान सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है — छत्तीसगढ़ का किसान इस मौसम में एक साथ कई संकटों से घिरा है।