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छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की समीक्षा, मुख्य सचिव ने दिए भौतिक सत्यापन के निर्देश

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Mananjpatel1996 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने महानदी भवन से आयोजित वर्चुअल बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों और विभागीय अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने को कहा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार का अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पूर्ण हो चुकी नल-जल योजनाओं का धरातल पर भौतिक सत्यापन कराया जाए। पंचायतों को सौंपी गई योजनाओं के रुके हुए भुगतानों को तत्काल निपटाने और सौर ऊर्जा संचालित पंप परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। जिन क्षेत्रों में जलस्रोतों की निरंतरता को लेकर तकनीकी समस्याएँ हैं, वहाँ स्थानीय निधि से कार्य पूर्ण कराने को कहा गया है। उप-अभियंताओं की कमी को पूरा करने के लिए आवश्यकतानुसार अन्य सरकारी विभागों के अभियंताओं की सेवाएँ लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने जिला जल एवं स्वच्छता समितियों की मासिक बैठकों और पिछले महीने के पालन प्रतिवेदन की भी समीक्षा की।

योजना के परिदृश्य के अनुसार, 15 अगस्त 2019 को शुरू हुए इस मिशन का मूल लक्ष्य दिसंबर 2024 तक राज्य के लगभग 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देना था, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाकर 2028 किया गया है। मार्च 2024 तक राज्य में 11,034 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय रैंकिंग में 23वें स्थान पर रहा। विधानसभा में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 तक राज्य के सभी 33 जिलों या 146 विकासखंडों में शत-प्रतिशत क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सका था।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में करीब 39 लाख यानी 78 प्रतिशत ग्रामीण घरों में पाइपलाइन पहुँचने का दावा किया गया है। 18 जिलों में कवरेज 76 से 98 प्रतिशत और 15 जिलों में 56 से 74 प्रतिशत के बीच रहा। धमतरी में सर्वाधिक 98 प्रतिशत तथा बलौदाबाजार में 76 प्रतिशत काम हुआ। बालोद और दुर्ग जैसे भूजल संकट वाले इलाकों तथा बस्तर व सरगुजा के जनजातीय अंचलों में नियमित जलापूर्ति अब भी चुनौती बनी हुई है। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक ग्रामीण तक नल से जल पहुँचाना जिला प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी होगी।

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