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जांजगीर-चांपा में 15 नवंबर से 134 केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, बायोमेट्रिक सत्यापन रहेगा अनिवार्य

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Jacob / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

जांजगीर-चांपा ज़िले में आगामी 15 नवंबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का काम शुरू किया जा रहा है। प्रशासनिक योजना के अनुसार यह खरीदी अभियान 31 जनवरी 2027 तक चलेगा। शासन की ओर से तय नियमों के तहत पंजीकृत कृषकों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर उपज ली जाएगी। प्रत्येक एकड़ के मान से किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल धान लेने की सीमा इस सत्र में निर्धारित की गई है।

ज़िले में धान उपार्जन के लिए इस बार कुल 134 केंद्र क्रियाशील किए गए हैं, जो 102 सेवा सहकारी समितियों के दायरे में संचालित होंगे। पिछले सत्र में 129 उपार्जन केंद्रों से किसानों की फसल खरीदी गई थी। इस बार पाँच अतिरिक्त केंद्र तैयार किए गए हैं। ज़िले में तैयार किए गए इन नए उपार्जन केंद्रों में कनस्दा, पोड़ी राछा, पचेड़ा, कुरदा और दुरपा को रखा गया है। नए केंद्रों की स्थापना से ग्रामीण अंचलों के कृषकों को धान पहुँचाने में सहूलियत मिलने की संभावना जताई गई है।

उपार्जन व्यवस्था में शामिल होने के लिए कृषकों का एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से पंजीयन कराना अनिवार्य रखा गया है। इस बार ज़िले में पंजीकृत किसानों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल जहाँ 1 लाख 23 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था, वहीं इस साल यह आँकड़ा करीब एक हजार अधिक दर्ज हुआ है। मंडियों में सुचारू कामकाज और भीड़ से बचाव के लिए टोकन व्यवस्था लागू रहेगी, जिसके तहत तय तारीख पर ही तौल कराई जाएगी।

इस खरीफ सत्र में धान बेचने की प्रक्रिया में तकनीकी सुधार किए गए हैं। पहले प्रचलित केवल ओटीपी आधारित सत्यापन व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसान अथवा उनके नामांकित व्यक्ति का बायोमेट्रिक सत्यापन होना अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा उपार्जन केंद्रों पर धान की गुणवत्ता जांचने के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। यदि किसी किसान के धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है, तो उस खेप को केंद्रों पर अस्वीकृत किया जा सकेगा।

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