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तकनीकी पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश पर रोक, डीटीई ने नियमों के उल्लंघन पर दी चेतावनी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Umesh Ratre / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने राज्य के निजी विश्वविद्यालयों और अशासकीय व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में तकनीकी पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश पर कड़ा रुख अपनाया है। संचालनालय ने सभी निजी शिक्षण संस्थानों के कुलसचिवों को आधिकारिक पत्र जारी कर सामान्य प्रवेश परीक्षा और सरकारी प्रक्रिया के तहत ही दाखिले सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था कोई नया नियम नहीं है। छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था अधिनियम 2008 में प्रवेश और शुल्क विनियमन से संबंधित कानूनी प्रावधान पहले से ही दर्ज हैं। अब उन्हीं स्थापित नियमों का सख्ती से क्रियान्वयन कराने के लिए यह पत्र भेजा गया है। सहायता प्राप्त न करने वाले निजी संस्थानों में स्वीकृत सीटों पर प्रवेश राज्य सरकार द्वारा तय प्रवेश परीक्षा की प्रावीण्य सूची के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य है।

संचालनालय के अनुसार यह व्यवस्था बीई, बीटेक, एमटेक, एमबीए, एमसीए, डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग और फार्मेसी जैसे सभी तकनीकी पाठ्यक्रमों पर प्रभावी होगी। इन पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए संबंधित कोर्स पर लागू राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षाओं जैसे सीजी पीईटी, सीजी पीपीएचटी, पीपीटी, प्री-एमसीए अथवा जेईई की मेरिट के आधार पर निर्धारित काउंसिलिंग प्रक्रिया का पालन करना होगा।

तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने चेतावनी दी है कि तय प्रक्रिया का उल्लंघन करके सीधे दिया गया कोई भी प्रवेश पूरी तरह नियम विरुद्ध माना जाएगा। ऐसे किसी भी दाखिले को अधिनियम के तहत शून्य यानी अमान्य घोषित किया जा सकता है। विभाग ने साफ किया है कि अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

निर्देश पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि यदि अवैध प्रवेश के कारण विद्यार्थियों को आगे चलकर कोई शैक्षणिक नुकसान होता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही संबंधित निजी विश्वविद्यालय की होगी। भविष्य में डिग्री की अमान्यता या छात्रवृत्ति की अपात्रता जैसी किसी भी समस्या के लिए निजी प्रबंधन ही उत्तरदायी माना जाएगा।

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