बिलासपुर सिम्स अस्पताल निर्माण टेंडर में पात्रता शर्तों की अनदेखी के आरोप

बिलासपुर के कोनी में सिम्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 800 बिस्तरों वाले नए भवन निर्माण हेतु जारी 1,321.27 करोड़ रुपए के टेंडर में तकनीकी पात्रता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन द्वारा आमंत्रित इस निविदा में सरकारी उपक्रम की औपचारिक भागीदारी के बाद भी यह अनुबंध निजी एजेंसी डीवी प्रोजेक्ट्स को प्रदान किया गया है।
टेंडर की तकनीकी पात्रता शर्त 1.4.1 बी(II) के प्रावधानों के तहत बोलीदाता एजेंसी के पास न्यूनतम 500 बिस्तरों वाले कम से कम एक अस्पताल के निर्माण का कार्य अनुभव होना अनिवार्य था। संबंधित निजी फर्म ने अपनी तकनीकी बोली में इंदौर स्थित ईएसआईसी अस्पताल का अनुभव प्रमाण पत्र संलग्न किया। इस दस्तावेज में 300 बिस्तरों के अस्पताल निर्माण और आगामी समय में 500 बिस्तरों तक के विस्तार का ही उल्लेख दर्ज था। इसके उपरांत भी एजेंसी की तकनीकी दावेदारी को मान्य घोषित कर दिया गया।
इसके अलावा निविदा में अनुबंध पूर्व सत्यनिष्ठा समझौते को 100 रुपए के गैर-न्यायिक स्टांप पर नोटरी करवाकर प्रस्तुत करने की वैधानिक शर्त तय थी। आरोप है कि सफल फर्म द्वारा इस अनिवार्य प्रारूप को सामान्य लेटरहेड पर ही जमा कराया गया था।
उल्लेखनीय है कि इस टेंडर प्रक्रिया में केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम ब्रिजेज एंड रूफ ने भी हिस्सा लिया था। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व में जनवरी माह के दौरान सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाओं का कार्य एचएलएल नामक सार्वजनिक उपक्रम को मनोनीत आधार पर सौंपा गया था। चयनित निजी फर्म कोरबा के पूर्व सांसद स्वर्गीय बंशी महतो के पुत्र विकास महतो से संबद्ध बताई गई है। इससे पूर्व अक्टूबर 2025 में भी इसी एजेंसी को गीदम, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम मेडिकल कॉलेज से जुड़े 255.15 करोड़ रुपए के अनुमानित कार्यों को 25 से 28 प्रतिशत तक ऊंची दरों पर सौंपा गया था, जिसमें गीदम का कार्य 326.53 करोड़ रुपए में दिया गया था।
कंपनी के प्रतिनिधि दीपक पटेल के अनुसार उनकी संस्था सभी तकनीकी मानदंडों पर पात्र पाई गई है। दूसरी ओर ब्रिजेज एंड रूफ के रायपुर कार्यालय के प्रतिनिधि रवि मेहता ने इस विषय को कोलकाता मुख्यालय से संबंधित बताया है।