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मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर में बेमौसम बरसात से डूबी धान की फसल, किसानों को भारी क्षति की आशंका

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Nanditha Gogate, WELL Labs / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के अनेक गाँवों में अचानक हुई तेज बरसात से खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी और काटकर रखी गई धान की फसल जलमग्न हो गई है। खेतों में अत्यधिक जलभराव के चलते पौधों की जड़ें गलने लगी हैं और धान की बालियों में अंकुरण शुरू हो गया है। इससे पैदावार की गुणवत्ता खराब होने और अनाज सड़ने का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार खरीफ सत्र 2025-26 के दौरान जिले में धान का रकबा 922 हेक्टेयर घटकर 32,920 हेक्टेयर रह गया है। कोरिया तथा एमसीबी अंचल में इस वर्ष कुल 11 लाख 37 हजार 468 क्विंटल धान उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस कृषि कार्य के सिलसिले में सहकारी बैंक के माध्यम से काश्तकारों को 50 करोड़ रुपये का ऋण भी वितरित किया गया था। कटाई के ऐन वक्त पर हुई बरसात ने अन्नदाताओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।

ग्राम पंचायत चिड़ौली के काश्तकार रामप्रसाद अहिरवार ने बताया कि उनके पाँच एकड़ खेत में लगी पूरी उपज पानी में डूब गई है। बेला गाँव के निवासी कमलेश के अनुसार उनके पिता के नाम दर्ज ढाई एकड़ भूमि में बोया गया धान पानी भरने से तबाह हो गया है। जड़ों के गलने और दानों में अंकुरण फूटने से पूरी गुणवत्ता चौपट हो गई है। कृषक संखपाल ने कहा कि खेतों में पानी भर जाने से कटाई ठप पड़ गई है तथा पकी फसल तेजी से नष्ट हो रही है।

छिरहाटोला की महिला कृषक राजकुमारी ने जानकारी दी कि लगातार तीन से चार दिनों की बरसात से उनके पाँच खेतों में काटकर रखी गई उपज भीग गई। फसल पकने पर उन्होंने कटाई कर ली थी, लेकिन पानी गिरने से सब बर्बाद हो गया। इससे उन्हें करीब 80 से 90 हजार रुपये की सीधी आर्थिक क्षति पहुँची है।

गाँवों के काश्तकारों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो खेतों से बची फसल समेटना भी मुमकिन नहीं रहेगा। अत्यधिक नमी के कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों को आगे सरकारी उपार्जन केंद्रों में उपज बेचने के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

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