महतारी वंदन योजना: ई-केवाईसी सत्यापन के दौरान अनियमितताओं और तकनीकी बाधाओं से जूझ रही महिलाएँ

छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को हर महीने एक हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में प्रदान की जा रही है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, कोरबा ज़िले की निवासी शुकवारो बाई जैसी हितग्राहियों को इस पहल से नियमित संबल प्राप्त हो रहा है। विभागीय दावों के मुताबिक, मार्च 2024 में शुरू की गई इस योजना से प्रदेश भर की लगभग 70 लाख महिलाएँ लाभान्वित हो रही हैं और वे इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य, घरेलू आवश्यकताओं और बच्चों की शिक्षा में कर रही हैं।
योजना का लाभ लगातार पाने के लिए शासन ने हितग्राहियों के लिए ई-केवाईसी सत्यापन कराना अनिवार्य किया है। कोरबा ज़िले में यह कार्य निर्धारित सीएससी केंद्रों और आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आईडी के ज़रिये पूरा कराया जा रहा है। प्रमाणीकरण के लिए लाभार्थियों को केवल अपना आधार कार्ड और पंजीयन क्रमांक प्रस्तुत करना होता है। केंद्रों पर कार्य संचालन के लिए लैपटॉप और बायोमेट्रिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है और संचालकों को प्रति सफल सत्यापन 9.84 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
जमीनी स्तर पर सत्यापन के दौरान कई परेशानियाँ भी सामने आ रही हैं। कोरबा के राराखार क्षेत्र के कांग्रेस पार्षद रवि चंदेल सहित अन्य पार्षदों ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपी है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि निःशुल्क सेवा के बावजूद चॉइस सेंटर संचालक महिलाओं से 50 से 70 रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर सुषमा साहू की मौजूदगी में भी पैसे लिए जाने का दावा करते हुए कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
इसके अतिरिक्त, ई-केवाईसी प्रक्रिया में सर्वर ठप होने और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क न मिलने से केंद्रों पर भारी भीड़ जुट रही है। दूरदराज़ के क्षेत्रों में बायोमेट्रिक मशीनों द्वारा वृद्ध महिलाओं के उंगलियों के निशान और पुतलियाँ स्कैन न हो पाने के कारण उन्हें बार-बार केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।