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महानदी जल विवाद: दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों का विमर्श

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Mananjpatel1996 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

महानदी जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस विमर्श में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी उपस्थित रहे। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों प्रदेशों के मुख्य सचिव, जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी सम्मिलित हुए।

शासकीय जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों ने आपसी सहमति और सतत संवाद के जरिए इस पुराने विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने पर जोर दिया। इससे पहले दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के नेतृत्व में आयोजित बैठक में भाग लिया था, जिसके उपरांत तकनीकी स्तर पर वार्ता जारी रखने का फैसला हुआ था। महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने भी दोनों राज्यों के मध्य परस्पर समझौते के प्रयासों का समर्थन किया है, जबकि केंद्रीय जल आयोग इस विषय के तकनीकी तौर-तरीकों पर कार्य कर रहा है।

राज्य सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी का उद्गम स्थल छत्तीसगढ़ में है और इसका आधे से अधिक जलग्रहण क्षेत्र इसी राज्य में पड़ता है। एक अधिकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ की 78 प्रतिशत आबादी महानदी बेसिन पर निर्भर है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय में राज्य के कृषकों, सिंचाई क्षेत्र और जनजातीय इलाकों की पानी की आवश्यकताओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने हीराकुंड बांध के संचालन में सहयोग देने और ओडिशा के हितों के संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता दोहराई।

उल्लेखनीय है कि ओडिशा सरकार ने वर्ष 2016 में जल संसाधन मंत्रालय के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी। उसका आरोप था कि महानदी के ऊपरी हिस्से में औद्योगिक उपयोग हेतु छह बैराज बनाए जाने से कम पानी वाले मौसम में निचले क्षेत्रों का बहाव घटता है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर 2018 में गठित महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के पास यह प्रकरण विचाराधीन है।

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