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मुंगेली में अघोषित बिजली कटौती से संकट, विद्युत विभाग के रवैये पर उपभोक्ताओं में नाराजगी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Mettle30 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुंगेली ज़िले के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा के मौसम के दौरान लगातार हो रही अघोषित विद्युत कटौती से आम नागरिकों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कई-कई घंटे आपूर्ति ठप रहने से लोगों की दिनचर्या बुरी तरह चरमरा गई है। बिजली न रहने के कारण घरेलू कामकाज के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति, निस्तारी और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों का संचालन प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ताओं की शिकायतों पर भी विद्युत तंत्र से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।

स्थानीय उपभोक्ताओं में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों की कार्यशैली और उदासीन रुख को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। नागरिकों की सबसे प्रमुख शिकायत यह है कि विद्युत आपूर्ति बंद करने से पूर्व किसी भी प्रकार की आधिकारिक पूर्व सूचना जारी नहीं की जाती। बिजली गुल होने के बाद जब नागरिक शिकायत केंद्रों या अधिकारियों से संपर्क साधते हैं, तो उन्हें स्थिति की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। पूर्व सूचना के अभाव में आम जनता पानी के भंडारण और अन्य वैकल्पिक प्रबंध करने में लाचार साबित हो रही है।

उपभोक्ताओं का यह भी आरोप है कि आपूर्ति बाधित होने पर ज़िम्मेदार अधिकारी प्रायः दूरभाष पर संपर्क साधने पर फोन नहीं उठाते। यदि किसी अधिकारी से बातचीत हो भी जाती है, तो वे समस्या की वास्तविक वस्तुस्थिति समझाने के स्थान पर उपभोक्ताओं को सीधे लाइनमैन से बात करने का निर्देश दे देते हैं। नागरिकों का कहना है कि बिजली अमले के ज़िम्मेदार प्रतिनिधि उपभोक्ताओं की सहायता करने के बजाय अपने पद और प्रोटोकॉल की दुहाई देने लगते हैं। लोगों का तर्क है कि वे किसी निजी कार्य के लिए नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की मूलभूत विद्युत व्यवस्था के निवारण हेतु संपर्क करते हैं।

विद्युत व्यवधान के समय विभागीय स्तर से केवल यही औपचारिक उत्तर दिया जाता है कि खराबी आई है और उसे ठीक किया जा रहा है। हालांकि यह खराबी किस स्थान पर हुई है, तकनीकी समस्या कितनी गंभीर है और आपूर्ति कब तक बहाल हो सकेगी, इस विषय में कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जाती। पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव में क्षेत्रवासियों की कठिनाइयां निरंतर बढ़ रही हैं, जिससे नागरिकों में विभागीय कार्यप्रणाली के विरुद्ध असंतोष गहराता जा रहा है।

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