मोन्था चक्रवात की बेमौसम बारिश से कोरिया और एमसीबी के किसान बदहाल, धान की पकी फसल सड़ने की कगार पर

मोन्था चक्रवात के असर से उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया और एमसीबी जिलों में बेमौसम बारिश ने धान की पकी फसल को दोहरे संकट में डाल दिया है — खेतों में खड़ी फसल की कटाई नहीं हो पा रही, और जो धान खलिहान में रख दी गई थी वह भी भीगकर खराब हो रही है।
जोलगी गाँव के किसान शिवकरण यादव की 25 एकड़ की धान में से कुछ हिस्सा कटाई से पहले ही खेत में नष्ट हो गया, और कटाई के बाद आँगन में रखी फसल भी बारिश से सड़ रही है। उनके अनुसार इस नुकसान की राशि लगभग सवा लाख रुपये है और उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की माँग की है। किसान पूरन सिंह की 10 एकड़ की खेती पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है — खेत में काटकर रखी गई धान सड़ रही है, खड़ी फसल भी नष्ट हो गई है, और बारिश के कारण सब्जी-भाजी की खेती भी ठप पड़ी है जिससे परिवार की आजीविका सीधे प्रभावित हो रही है।
तोजा ग्राम पंचायत की स्थिति भी गंभीर है। किसान रामगोपाल सिंह के अनुसार वहाँ के अधिकांश किसानों की धान बर्बाद हो गई है। तोजा के सरपंच पति ने बताया कि लगभग 1200 की आबादी वाली इस पंचायत के सभी किसानों की फसल खेतों में पानी भरने से खराब हो गई है। लगातार वर्षा से कुछ घर भी गिर गए हैं और ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजे की माँग रखी है।
रायपुर के बनरसी और माना बस्ती क्षेत्रों में भी मौंथा तूफान के प्रभाव से नहर किनारे की धान की फसलें ज़मीन पर बिछ गई हैं। लंबी किस्म के धान के गिरे पौधों में नीचे से सड़न शुरू हो जाती है, जिससे कटाई के समय नुकसान और बढ़ जाता है। स्थानीय किसानों ने बताया कि खरीफ की धान फसल पर ही उनकी आर्थिक निर्भरता सबसे अधिक है, इसलिए इस आपदा का असर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर सीधे पड़ रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी हुई थी, तथा 2 नवंबर से बारिश रुकने का पूर्वानुमान था। सरगुजा जिले में भी धान की फसल पकने की अवस्था में पहुँच चुकी थी और बालियाँ निकल आई थीं, जिससे वहाँ के किसानों की चिंता भी बढ़ी हुई है।
कोरिया के कृषि अधिकारियों के अनुसार बीमा कवरेज की शर्तों के आधार पर मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और कृषि, राजस्व विभाग तथा पंचायत विभाग संयुक्त रूप से नुकसान का सर्वे करेंगे। हालाँकि किसानों का कहना है कि फसल बीमा की राशि मिलने की प्रक्रिया उनके लिए अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है।