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रायपुर में चिटफंड पीड़ितों के साढ़े तीन करोड़ रुपये सरकारी खाते में फंसे, दस्तावेज़ न मिलने से रुका भुगतान

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Shreyasime / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

रायपुर ज़िले में धोखाधड़ी का शिकार हुए लगभग तीस हज़ार चिटफंड निवेशकों की करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की राशि पिछले एक साल से शासकीय खाते में पड़ी हुई है। पुलिस और प्रशासनिक अमले द्वारा कुर्क की गई कंपनियों की संपत्तियों को नीलाम कर यह धन जुटाया गया था। इसके बावजूद जमाकर्ताओं द्वारा निवेश से जुड़े प्रामाणिक दस्तावेज़ पेश न कर पाने की वजह से प्रशासन भुगतान प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर राशि वितरित करने के लिए निवेशकों से कंपनियों में जमा रकम की रसीद अथवा बॉन्ड की मूल या छायाप्रति मांगी जा रही है। पात्र हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार करने के उद्देश्य से अपर कलेक्टर ने रायपुर एसडीएम को कई बार पत्र भी प्रेषित किए हैं। अधिकारियों के बार-बार सूचित करने के बाद भी अधिकांश पीड़ित ठगी का दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके हैं, जिससे सूची को अंतिम रूप देने का काम रुका हुआ है।

प्रशासन से प्राप्त विवरण के मुताबिक, विभिन्न चिटफंड संस्थाओं की अचल संपत्तियों की नीलामी से यह राशि एकत्र की गई थी। इसमें शुष्क इंडिया कंपनी लिमिटेड की परिसंपत्तियों से 2.12 करोड़ रुपये, गोल्ड की इंफ्रावेंचर लिमिटेड एवं बे सिड बेनीफीट लिमिटेड से 81 लाख रुपये, निर्मल इंफ्रा होम कार्पोरेशन लिमिटेड से 51.51 लाख रुपये और आरोग्य धन वर्षा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड से 11.85 लाख रुपये जुटाकर सरकारी कोष में जमा कराए गए थे। इसके अलावा अभनपुर क्षेत्र में स्थित माइक्रो फायनेंस कंपनी की ज़मीन की नीलामी 14 जुलाई को तय की गई थी, किंतु तकनीकी बाधाओं के चलते उसे स्थगित करना पड़ा।

समूचे प्रदेश के आंकड़ों के अनुसार शासन द्वारा चिटफंड कंपनियों की 127 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं। इनमें से अब तक 54.90 करोड़ रुपये की संपत्ति नीलाम कर राशि राजकोष में आ चुकी है, जिसमें से छत्तीसगढ़ के 45,593 प्रभावित निवेशकों को 33.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अकेले रायपुर ज़िले में इससे पूर्व 9,866 पीड़ितों को 4.14 करोड़ रुपये की राशि लौटाई गई थी, जिसमें बड़ी रकम देवयानी प्रापर्टी लिमिटेड के निवेशकों की थी।

प्रक्रियागत दिक्कतों के संदर्भ में अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में पीड़ितों से ऑफलाइन माध्यम से आवेदन संकलित किए गए थे। अब पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन कर नए सिरे से आवेदन मंगाए जा रहे हैं। नए नियमों के तहत प्रमाण स्वरूप रसीद और बॉन्ड प्रस्तुत करने की अनिवार्यता के कारण वास्तविक दावेदारों की पहचान और वितरण की प्रशासनिक कार्यवाही रुकी हुई है।

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