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राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा सुधार: नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स ने मांगे सुझाव, साल में चार बार परीक्षा का विचार

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Raunak005 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

देश भर में प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा, संचालन और प्रशासनिक ढांचे को पुख्ता करने के लिए केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय टास्क फोर्स ने आम नागरिकों और सभी संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली यह समिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की व्यवस्था में बदलाव की रूपरेखा बना रही है। केंद्र सरकार ने इस परामर्श प्रक्रिया में भाग लेने के लिए 13 सितंबर 2026 तक की अंतिम तिथि निर्धारित की है।

नीट यूजी 2026 के दौरान सामने आई प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं और प्रशासनिक विसंगतियों को देखते हुए 2027 के सत्र के लिए यह पहल शुरू की गई है। टास्क फोर्स मुख्य रूप से परीक्षाओं के डिजाइन, डिजिटल गवर्नेंस, आयोजन प्रणाली और पेपर लीक रोकने के उपायों पर मंथन कर रही है। समिति के स्तर पर परामर्श जुटाने का काम जारी है और अक्टूबर 2026 के आसपास नीट यूजी 2027 के नए परीक्षा प्रारूप की घोषणा होने की संभावना जताई गई है।

इस बीच शिक्षाविदों और जन प्रतिनिधियों की ओर से परीक्षा सुधार को लेकर कई बिंदु सामने आए हैं। राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने सुझाव दिया है कि यदि अभ्यर्थियों को एक से डेढ़ साल की अवधि में चार बार प्रवेश परीक्षा देने की सुविधा मिले और उनके सर्वश्रेष्ठ अंक को मेरिट का आधार बनाया जाए, तो लगभग नब्बे प्रतिशत समस्याओं को हल किया जा सकता है। उनका कहना है कि छात्र दसवीं के बाद से ही मेडिकल प्रवेश की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन पूरे भविष्य का फैसला केवल एक दिन के तीन घंटे के इम्तिहान पर टिक जाना भारी मानसिक दबाव पैदा करता है।

सांसद के अनुसार, केवल एक ही दिन की परीक्षा पर अत्यधिक निर्भरता रहने से पेपर लीक और अनुचित साधनों को बढ़ावा मिलता है। वर्ष में कई बार अवसर मिलने से तनाव कम होगा और किसी एक दिन की विफलता के डर से मुक्ति मिलेगी। छात्रों पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए आवेदन शुल्क न्यूनतम रखने का भी सुझाव रखा गया है। टास्क फोर्स सभी सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।

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