वैश्विक बाजार में चावल की कीमतों में उछाल, भारतीय निर्यात दरें एक वर्ष के उच्च स्तर पर

अल नीनो के प्रभाव से उत्पन्न वैश्विक आपूर्ति संकट की आशंकाओं के कारण एशियाई मंडियों में चावल के निर्यात भाव में तेजी आई है। इस दौरान भारत का निर्यात चावल करीब एक वर्ष के अपने सर्वाधिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
कारोबारियों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पांच प्रतिशत टूटे दानों वाले पारबॉयल्ड चावल की कीमत 362 से 368 डॉलर प्रति टन हो गई है, जो पिछले हफ्ते 358 से 364 डॉलर प्रति टन थी। इसके साथ ही पांच प्रतिशत टूटे भारतीय सफेद चावल का मूल्य 359 से 364 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया। नई दिल्ली के व्यापारियों के अनुसार, बेनिन सहित कई अफ्रीकी देशों से लगातार आ रही मजबूत मांग से भारतीय दरों को निरंतर सहारा मिल रहा है।
वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारत के कुल चावल निर्यात में बीते वर्ष के मुकाबले पांच प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह उछाल मुख्य रूप से गैर-बासमती चावल के मजबूत शिपमेंट के कारण संभव हुआ। इस बढ़ोतरी ने अमेरिका, इज़राइल और ईरान के तनाव से उपजे व्यापारिक व्यवधान के बाद खाड़ी देशों में बासमती चावल की घटी मांग की भरपाई कर दी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वियतनाम का पांच प्रतिशत टूटा चावल बढ़कर 435 से 455 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है, जो पूर्व में 430 से 450 डॉलर प्रति टन था। हो ची मिन्ह सिटी के कारोबारियों ने बताया कि व्यापक गर्मी के चलते वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी बीच बांग्लादेश सरकार ने घरेलू बाजार की कीमतों को साधने के लिए एक समझौते के तहत वियतनाम से 416 डॉलर प्रति टन पर 1,00,000 टन पारबॉयल्ड चावल मंगाने की अनुमति दी है।
थाईलैंड में पांच प्रतिशत टूटे चावल का भाव 450 से 455 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया। बैंकॉक के व्यापारियों के अनुसार, अल नीनो की आशंका में मलेशिया और फिलीपींस ने अपनी खरीद बढ़ा दी है। थाई आपूर्ति में इस साल 15 लाख टन की गिरावट की संभावना के बावजूद देश द्वारा 2026 में 70 लाख टन चावल निर्यात का अनुमान लगाया गया है।