श्रीलंकाई गायिका चंपा कलहरी लखनऊ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में करेंगी पीएचडी

श्रीलंका की जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री चंपा कलहरी जयसेकरा लखनऊ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और जनसंचार विषय में शोध कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के संबंधित विभाग में पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए औपचारिक अर्जी दी है।
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आरपी सिंह के मुताबिक विदेशी विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए निर्धारित नियमावली के तहत प्राप्त आवेदन पत्रों की विधिवत जांच की जाती है। चंपा कलहरी ने मीडिया स्टडीज विषय में परास्नातक उपाधि प्राप्त की है, जिससे वे इस शोध पाठ्यक्रम की आवश्यक अर्हता पूरी करती हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को उनका आवेदन प्राप्त हो चुका है और अब दाखिले से जुड़ी शेष औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
कोलंबो में वर्ष 1974 में जन्मी चंपा कलहरी का लखनऊ शहर से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने संगीत का विधिवत प्रशिक्षण लखनऊ स्थित भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से पूरा किया था। उनके पिता एचडीएस जयसेकरा संगीत विशारद रहे हैं, जिनके सानिध्य में उन्हें पारिवारिक परिवेश से ही संगीत की प्रेरणा मिली।
चंपा कलहरी ने मात्र छह वर्ष की उम्र में संगीत की दुनिया में कदम रखा था। उस दौरान उन्होंने लता मंगेशकर से संबंधित ‘श्रीलंका मा प्रियदरा जय भूमि’ गीत प्रस्तुत किया था। इसके उपरांत उन्हें बच्चों के रेडियो कार्यक्रमों में गायन का अवसर मिला। उन्होंने भारत से भी संगीत की उच्च तालीम हासिल की और अपने देश में हिंदी गीतों की प्रस्तुति के लिए विशिष्ट पहचान बनाई।
कलहरी के खाते में अब तक पंद्रह से अधिक संगीत एल्बम आ चुके हैं, जिनमें उनका पहला एल्बम ‘साथिरे’ शामिल था। नब्बे के दशक में उनका गाया गीत ‘सिथा पिया सलाला’ श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। उन्होंने सिंहली सिनेमा में पार्श्व गायन के अलावा लोकप्रिय सिंहली रचनाओं के हिंदी रूपांतरण भी रिकॉर्ड किए हैं। रेडियो, टेलीविजन और अभिनय के विस्तृत अनुभव के बाद अब वे अपने मीडिया अध्ययन को अकादमिक शोध के जरिए विस्तार दे रही हैं।