सामुदायिक वन अधिकार: नोडल एजेंसी विवाद पर आदिवासी संगठनों का कड़ा विरोध, आदेश रद्द करने की माँग

छत्तीसगढ़ में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विवाद गहरा गया है। वन विभाग ने स्वयं को इन अधिकारों के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी घोषित किया है। इस परिपत्र के सामने आने के बाद आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने इस प्रशासनिक कदम को वनाधिकार मान्यता कानून 2006 का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए मुख्यमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
संगठन की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि वनाधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की मूल वैधानिक ज़िम्मेदारी केंद्र में आदिवासी कार्य मंत्रालय और राज्यों में आदिवासी विकास विभाग के पास है। प्रतिनिधियों का आरोप है कि 15 मई 2025 को जारी इस आदेश से आदिवासी विकास विभाग के वैधानिक अधिकार क्षेत्र पर सीधा अतिक्रमण हुआ है। इसके अलावा ग्रामसभाओं और उनकी सामुदायिक वन प्रबंधन समितियों द्वारा बनाई गई संरक्षण तथा प्रबंधन योजनाओं को लागू करने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
विवाद का एक मुख्य बिंदु आदेश में दिए गए प्रशासनिक संदर्भ हैं। संगठन के अनुसार वन विभाग ने अपने इस कदम को 28 मई 2020 के उस पुराने निर्णय पर आधारित बताया है जिसे राज्य सरकार पहले ही जनविरोध के बाद वापस ले चुकी है। इसके साथ ही परिपत्र में सर्वोच्च न्यायालय के टीएन गोदावर्मन वाद और नेशनल वर्किंग प्लान कोड 2023 का हवाला देते हुए केवल वर्किंग प्लान पर आधारित वैज्ञानिक प्रबंधन को मान्य बताया गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि यह निर्देश ग्रामसभाओं की समुदाय आधारित वन प्रशासन व्यवस्था को कमजोर कर वन विभाग के एकाधिकार को बढ़ावा देता है।
आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का भी उल्लेख किया। इस योजना के अंतर्गत ग्रामसभाओं को वनों के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए ₹15 लाख की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। संगठनों का कहना है कि नए आदेश से ज़मीनी स्तर पर ग्रामसभाओं की अधिकार संपन्न भूमिका बाधित होगी। प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से इस आदेश को अविलंब निरस्त करने, आदिवासी विकास विभाग को ही नोडल एजेंसी बनाए रखने का लिखित आश्वासन देने और ग्रामसभाओं की प्रबंधन योजनाओं को तुरंत मान्यता प्रदान करने की माँग की है।