शासन-प्रशासन

सामुदायिक वन अधिकारों पर वन विभाग के आदेश का विरोध, नोडल एजेंसी के दर्जे पर विवाद

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Harminder Singh Saini / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के क्रियान्वयन को लेकर वन विभाग के एक परिपत्र पर विवाद खड़ा हो गया है। वन विभाग ने इन अधिकारों की मान्यता के लिए स्वयं को नोडल विभाग का दायित्व सौंपा है। आदिवासी संगठनों ने इस कदम को अवैध बताते हुए मुख्यमंत्री से फौरन दखल देने और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग उठाई है।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने इस संबंध में विज्ञप्ति जारी कर कहा कि वनाधिकार मान्यता कानून 2006 आदिवासी और अन्य पारंपरिक वन निवासियों से जुड़ा विषय है। इसलिए केंद्र में आदिवासी कार्य मंत्रालय और राज्य स्तर पर आदिवासी विकास विभाग ही इसके क्रियान्वयन के लिए वैधानिक नोडल विभाग है। संगठन के मुताबिक 15 मई 2025 को जारी परिपत्र के जरिए वन विभाग ने खुद को नोडल एजेंसी बनाने की कोशिश की है, जो आदिवासी विकास विभाग के अधिकार क्षेत्र पर सीधा अतिक्रमण है।

संगठन ने आरोप लगाया कि यह नया निर्देश 28 मई 2020 के उस पुराने निर्णय पर टिका है, जिसे व्यापक विरोध के बाद सरकार पहले ही वापस ले चुकी थी। उनका कहना है कि इस आदेश के जरिए वन विभाग ग्राम सभाओं और उनकी सामुदायिक वन अधिकार प्रबंधन समितियों द्वारा बनाई गई संरक्षण व प्रबंधन योजनाओं को लागू करने से रोकने का प्रयास कर रहा है, जिससे समुदाय आधारित वन शासन प्रभावित होगा।

वन विभाग ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के टीएन गोदावर्मन वाद और नेशनल वर्किंग प्लान कोड 2023 का उल्लेख करते हुए केवल वर्किंग प्लान आधारित वैज्ञानिक प्रबंधन को मान्य बताया है। इस पर सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वन क्षेत्रों में प्रबंधन का मूल कार्य ग्राम सभाएँ करती हैं और बाहरी संस्थाएँ केवल तकनीकी सहयोग देती हैं।

संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार के ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत ग्राम सभाओं को संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए 15 लाख रुपए देने की योजना है। इसके विपरीत राज्य में वन विभाग अपने एकाधिकार को बढ़ा रहा है। संगठन ने सरकार से आदेश तत्काल निरस्त करने, आदिवासी विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाए रखने की लिखित पुष्टि करने और ग्राम सभाओं की प्रबंधन योजनाओं को बिना देरी मान्यता देने की माँग की है।

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