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सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बदलाव की तैयारी, छत्तीसगढ़ सरकार मध्य प्रदेश के युवा अन्नदूत मॉडल का कर रही अध्ययन

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने और राशन परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के मॉडल को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार पड़ोसी राज्य में संचालित मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के प्रारूप और कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था को अपनाने से राशन दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने की प्रक्रिया में ठेकेदारी प्रथा और बिचौलियों की भूमिका पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

मध्य प्रदेश में इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। प्राप्त विवरण के अनुसार, वहां निर्धारित मापदंडों के आधार पर चयनित लगभग नौ सौ से एक हजार युवाओं को खाद्यान्न परिवहनकर्ता के रूप में कार्य सौंपा गया है। इस मॉडल के तहत पात्र हितग्राहियों को मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराकर साढ़े सात मीट्रिक टन भार क्षमता वाले वाहन क्रय करने में मदद दी जाती है। इस वित्तीय सहायता में शासन द्वारा निर्धारित ब्याज दर पर तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान और सवा लाख रुपये की मार्जिन मनी राहत शामिल है। इन वाहनों के संचालन से प्रत्येक माह लगभग तीन हजार क्विंटल राशन सामग्री उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंचाई जा रही है।

इस योजना के प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं का जायजा लेने के लिए छत्तीसगढ़ के विभागीय अधिकारियों ने मध्य प्रदेश का दौरा कर जमीनी व्यवस्था की बारीकियों को समझा है। मध्य प्रदेश में राशन आपूर्ति की मॉनिटरिंग स्टेट कमांड कंट्रोल सेंटर के जरिए की जाती है। सभी अधिकृत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे आपूर्ति केंद्र से माल उठाने के बाद राशन दुकान तक पहुंचने का मार्ग और समय सीधे ट्रैक होता है। वाहन के निर्धारित रूट से हटने या अकारण रुकने पर नियंत्रण कक्ष को तत्काल अलर्ट मिल जाता है।

छत्तीसगढ़ में धान-चावल उपार्जन और पीडीएस वितरण का दायरा बहुत व्यापक है। शासन के अनुसार, यदि यह व्यवस्था राज्य में लागू की जाती है तो स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में होने वाली खाद्यान्न बर्बादी या अनियमितताओं पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।

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