आदिवासी नेता विष्णु देव साई: छत्तीसगढ़ के चौथे मुख्यमंत्री का राजनीतिक सफर और शासन की प्राथमिकताएँ

रायपुर। 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक चार व्यक्ति मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। राज्य के पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस के अजीत जोगी थे। उनके बाद भारतीय जनता पार्टी के रमन सिंह ने लगातार तीन कार्यकाल संभाले। तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस नेता भूपेश बघेल 2018 से 2023 तक इस पद पर रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की व्यापक जीत के बाद विष्णु देव साई ने 13 दिसंबर 2023 को चौथे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
साई की नियुक्ति के पीछे चुनावी गणित स्पष्ट है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में आदिवासी समुदाय की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग के बाद सबसे बड़ा समूह है। भाजपा ने आदिवासी बहुल सरगुजा क्षेत्र की सभी 14 विधानसभा सीटें जीतीं और बस्तर की 12 में से 8 सीटें हासिल कीं। एनडीटीवी के अनुसार, इसी असाधारण प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने किसी आदिवासी नेता को मुख्यमंत्री पद देने का निर्णय लिया।
साई का राजनीतिक अनुभव लंबा है। एनडीटीवी के अनुसार, वे चार बार लोकसभा सांसद रहे और 2020 से 2022 तक प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद पर रहे। 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने पर उन्हें इस्पात मंत्रालय में कनिष्ठ मंत्री का दायित्व मिला था। वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रह चुके हैं। एनडीटीवी यह भी रेखांकित करती है कि 59 वर्षीय साई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी माने जाते हैं और उनकी छवि विवादमुक्त रही है।
पदग्रहण के तत्काल बाद एनडीटीवी के अनुसार साई ने कहा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख हितग्राहियों को मकान स्वीकृत करना उनकी सरकार का पहला काम होगा। यह साई का अपना वक्तव्य था; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
विकिपीडिया स्रोत के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में है और शासकीय आवास सिविल लाइंस, रायपुर का बी-3 बंगला है। संविधान के प्रावधानों के तहत राज्यपाल द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और विधानसभा में बहुमत बनाए रखना इसकी अनिवार्य शर्त है।