उद्यानिकी विभाग में अधिकारियों की कमी, 11 ज़िले अतिरिक्त प्रभार के भरोसे

छत्तीसगढ़ के उद्यानिकी विभाग में नियमित अधिकारियों के अभाव के कारण 11 ज़िलों का प्रशासनिक कामकाज अतिरिक्त प्रभार के सहारे संचालित हो रहा है। राज्य के कुल 33 ज़िलों में से केवल 22 ज़िलों में ही नियमित ज़िला अधिकारी तैनात हैं। इनमें 17 ज़िलों में सहायक संचालक और 5 ज़िलों में उप संचालक स्तर के अधिकारी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
विभाग में नियमित अधिकारियों की पदस्थापना न होने वाले ज़िलों में कोंडागांव, सुकमा, धमतरी, महासमुंद, राजनांदगांव, बेमेतरा, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और रायगढ़ शामिल हैं। इन ज़िलों में व्यवस्था सँभालने के लिए निकटवर्ती अथवा दूरस्थ ज़िलों में पदस्थ अफसरों को दो से तीन ज़िलों का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। कई क्षेत्रों में मूल मुख्यालय और प्रभार वाले क्षेत्र के बीच की दूरी 200 से 300 किलोमीटर तक है, जिससे अधिकारियों का बड़ा समय आने-जाने में ही निकल जाता है।
कबीरधाम में पदस्थ विजय त्रिपाठी कोरिया के साथ मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर का कामकाज देख रहे हैं। इन मुख्यालयों के बीच 287 किलोमीटर की दूरी तय करने में आने-जाने के 14 घंटे लग जाते हैं। इसी तरह कांकेर में पदस्थ मीना मंडावी 215 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा का प्रभार संभाल रही हैं, जहाँ आवागमन में करीब 9 घंटे खर्च होते हैं। बस्तर संभाग में जगदलपुर के अधिकारी नारायणपुर व कोंडागांव और सुकमा के अधिकारी बीजापुर का प्रभार देख रहे हैं।
सड़क पर लंबा समय बीतने के कारण मैदानी निरीक्षण, योजनाओं की निगरानी और जनसुनवाई पर सीधा असर पड़ रहा है। अधिकारियों के नियमित न रहने से शेडनेट, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी योजनाओं में भौतिक सत्यापन का कार्य रुकने से किसानों का अनुदान अटका हुआ है। इसके साथ ही विभागीय पौधशालाओं, भवनों और पौध उत्पादन केंद्रों के निर्माण की गति प्रभावित हुई है। किसानों को क्षेत्रीय मार्गदर्शन और बीज या खेत से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं मिल पा रहा है। एक ही दिन अलग-अलग ज़िलों में बैठकें होने से अधिकारी उपस्थित नहीं हो पाते, जिससे जनप्रतिनिधियों में भी नाराजगी है।
प्रशासनिक स्तर पर करीब सात अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी का मामला पिछले दो वर्षों से मंत्रालय में अटका है। यह पदोन्नति होने पर रिक्त ज़िलों में नियमित पदस्थापना कर प्रभार व्यवस्था समाप्त की जा सकेगी।