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कोरबा में धान उपार्जन 15 नवंबर से, टोकन व्यवस्था 10 नवंबर से होगी शुरू

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: etvbharat.com

कोरबा ज़िले में खरीफ विपणन सत्र के तहत धान उपार्जन की प्रशासनिक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। खाद्य सचिव रीना कंगाले की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने वस्तुस्थिति से अवगत कराया। ज़िले में धान उपार्जन का कार्य 15 नवंबर से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक चलेगा। उपार्जन के लिए टोकन आबंटन का काम 10 नवंबर से प्रारंभ होगा। मार्कफेड एवं मिलर्स के माध्यम से उपार्जन केंद्रों तक नए तथा पुराने बारदाने पहुँचा दिए गए हैं।

प्रशासनिक विवरण के मुताबिक, किसानों की सुविधा के लिए टोकन व्यवस्था को दो हिस्सों में बाँटा गया है। प्रत्येक दिन निर्धारित कुल टोकन में से सत्तर फ़ीसदी हिस्सेदारी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। यह डिजिटल सुविधा चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगी। बाकी तीस फ़ीसदी टोकन उपार्जन समितियों के स्तर पर सीधे जारी किए जाएंगे। किसान अपनी आवश्यकता के अनुरूप 15 जनवरी तक किसी भी कार्यदिवस का टोकन प्राप्त कर सकते हैं।

धान खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ज़िले के 21 केंद्रों को विशेष निगरानी श्रेणी में रखा गया है। पूर्व में अनियमितता या प्राथमिकी दर्ज होने वाले 3 केंद्रों को अति संवेदनशील माना गया है। इसके अलावा धान आवक, पंजीयन और रकबे में तेज़ बढ़ोतरी वाले 18 केंद्रों को संवेदनशील वर्ग में रखकर वहाँ प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है। ज़िले के 73 उपार्जन केंद्रों में नोडल अधिकारी नियुक्त हुए हैं, जबकि 60 समितियों में स्थानीय स्तर पर निगरानी दल गठित किए गए हैं। अपर कलेक्टर की देखरेख में ज़िला स्तर पर एक विशेष कमान एवं नियंत्रण केंद्र भी कार्य करेगा।

सीमावर्ती क्षेत्रों से अवैध धान के प्रवेश पर अंकुश लगाने के लिए 9 जाँच नाके स्थापित किए गए हैं। इनकी ज़िम्मेदारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है। ज़िले में 1 ज़िला स्तरीय और 12 तहसील स्तरीय उड़नदस्तों का गठन किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, कृषक उन्नति योजना के नियमों में इस बार बदलाव किया गया है। योजना के अंतर्गत आदान सहायता की गणना बेची गई उपज की मात्रा के बजाय पंजीकृत रकबे के अनुसार की जाएगी। यदि कोई पंजीकृत किसान धान नहीं बेचता है, तब भी वह इस सहायता का पात्र माना जाएगा। उपार्जन केंद्रों पर धान बेचने वाले कृषकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।

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