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खनिज संशोधन विधेयक से छत्तीसगढ़ के राजस्व और अधिकारों पर असर पड़ेगा: दीपक बैज

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: VishuN / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह नया संशोधन राज्य के आर्थिक हितों और संघीय व्यवस्था के पूरी तरह प्रतिकूल है। इस संशोधन के प्रभाव में आने से राज्य के वित्तीय अधिकार सीमित होंगे।

दीपक बैज के मुताबिक इस संशोधन के प्रभावी होने के बाद छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपन्न राज्य केंद्र की निर्धारित सीमाओं के परे जाकर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा पाएंगे। इसके तहत खनिज अधिकारों तथा खनिज युक्त जमीन पर राज्यों द्वारा अतिरिक्त उपकर या लेवी लगाने की शक्ति छिन जाएगी। उन्होंने रेखांकित किया कि इस व्यवस्था से राज्य का आंतरिक राजस्व संकलन सीधे तौर पर घटेगा और राज्य की वित्तीय स्वायत्तता कमजोर होगी।

विधेयक के कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल एमएमडीआर एक्ट 1957 के तहत प्रमुख खनिजों और गौण खनिजों के बीच एक स्पष्ट विभाजन तय था। नए प्रावधानों का सीधा मकसद राज्यों की कराधान शक्तियों को नियंत्रित करना है। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में दर्ज राज्य सूची के अनुसार भूमि का विषय पूरी तरह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में सुरक्षित है।

बैज ने यह भी रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2024 में अपने एक अहम फैसले में राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की पूर्ण मान्यता दी थी। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार का यह नया संशोधन सर्वोच्च न्यायालय के उसी फैसले के प्रभाव को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

दीपक बैज के अनुसार इस प्रकार के नीतिगत कदमों से खनिज समृद्ध राज्यों के स्वतंत्र राजस्व स्रोत सीमित हो जाएंगे। इस विषय पर प्रशासनिक और राजनीतिक मंचों पर बहस जारी है।

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