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दुर्ग में ग्राम सभाओं की कार्यवाही होगी डिजिटल, 15 मिनट की रिकॉर्डिंग ‘जीएस निर्णय’ ऐप पर दर्ज होगी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

गांधी जयंती के अवसर पर दो अक्टूबर को छत्तीसगढ़ भर की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन तय किया गया है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार इन बैठकों का केंद्रीय उद्देश्य स्थानीय प्राथमिकताओं और जरूरतों को संकलित कर जमीनी स्तर पर विकास योजनाएं तैयार करना है।

दुर्ग जिले में कार्यवाहियों की प्रामाणिकता बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर नया डिजिटल कदम उठाया गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार जिले के सभी पंचायत मुख्यालयों और आश्रित ग्रामों में होने वाली सभाओं की अधिकतम 15 मिनट की वीडियो तैयार की जाएगी। इस रिकॉर्डिंग को ‘जीएस निर्णय’ मोबाइल ऐप्लिकेशन पर प्रेषित करना अनिवार्य रहेगा। इस प्रक्रिया से सभा में उपस्थित ग्रामीणों, चर्चा के बिंदुओं और अनुमोदित प्रस्तावों का इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य दर्ज हो सकेगा। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था के प्रभाव से रजिस्टरों में मनमाने संशोधन या फर्जी प्रस्ताव तैयार करने की गुंजाइश सीमित होगी।

इन विशेष सत्रों के दौरान विकसित ग्राम पंचायत योजना तथा विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण के तहत प्राथमिकता वाले काम चिन्हित किए जा रहे हैं। वास्तविक आवश्यकताओं के आकलन हेतु सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन का सहारा लिया गया है। जमीनी अमले द्वारा युक्त धारा पोर्टल के जरिए परिसंपत्तियों और आधारभूत ढांचे का भौगोलिक खाका खींचा जा रहा है, ताकि विकास संबंधी अंतरालों को रेखांकित किया जा सके। इसके अतिरिक्त जल उपलब्धता व उपभोग का अनुमान लगाने के लिए वाटर बजटिंग भी की जा रही है, जिससे जल संरक्षण संरचनाओं का चयन हो सके।

आर्थिक शुचिता सुनिश्चित करने के लिए विगत बैठकों के प्रस्तावों पर क्रियान्वयन की प्रगति समीक्षा भी रखी जाएगी। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंचायतों की पिछली तिमाही का पूर्ण आय-व्यय ब्योरा ग्रामीणों के समक्ष प्रस्तुत होगा, जिसमें योजनाओं के मद, स्वीकृत राशि, वास्तविक व्यय और अधूरे निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति साझा की जाएगी।

दुर्ग के कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि ग्राम सभाओं के जरिए ग्रामीणों की सीधी सहभागिता से प्राथमिकताओं का निर्धारण संभव होता है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के अनुसार मोबाइल ऐप पर दृश्यात्मक प्रमाण सुरक्षित होने से पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी।

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