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गरियाबंद: 45 वर्षों बाद भी पक्की छत से वंचित छोटे गोबरा का स्कूल, जर्जर भवन में पढ़ने को विवश 55 विद्यार्थी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Domino786 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले अंतर्गत मैनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत छोटे गोबरा में स्थित प्राथमिक शाला भवन दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं और पक्की छत के लिए तरस रहा है। अविभाजित मध्य प्रदेश के समय 21 दिसंबर 1981 को तत्कालीन कलेक्टर नजीब हसन जंग द्वारा इस शाला भवन का शिलान्यास किया गया था। वर्तमान में इस विद्यालय की दीवारें और खपरैल की छत पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी हैं। इमारत की एक दीवार झुक जाने के कारण हर समय बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद 55 स्कूली बच्चे इसी असुरक्षित ढांचे में अध्ययन करने को विवश हैं।

स्थानीय स्थिति के अनुसार, वर्षा ऋतु के दौरान छत से पानी रिसने के कारण कमरों में कीचड़ और सीलन की समस्या गंभीर हो जाती है। विद्यालय में विद्यार्थियों के बैठने हेतु पर्याप्त फर्नीचर की कमी है और जो टेबल-कुर्सियां मौजूद हैं, उनमें से भी अधिकांश क्षतिग्रस्त हैं। चालू वर्ष में प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला भवनों का संविलियन होने के उपरांत शाला समिति को आवश्यक सुधार निधि नहीं मिल सकी है, जिसके चलते हर साल वर्षा से पूर्व केवल खपरैल बदलकर काम चलाया जाता है।

पुराने भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए ‘स्कूल जतन योजना’ के अंतर्गत नए शाला भवन की औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस स्वीकृति के लगभग चार वर्ष बीत जाने के पश्चात भी नए भवन का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। धीमी निर्माण गति के कारण विद्यार्थियों को नए परिसर का लाभ नहीं मिल सका है। पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र में समस्या के समाधान को लेकर ग्रामीणों में भारी असंतोष व्याप्त है।

ज़िला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर के अनुसार, पुराने भवन के जीर्णोद्धार और नवीन भवन को पूर्ण कराने हेतु शासन स्तर पर निरंतर पत्राचार किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में नक्सल संवेदनशीलता के कारण निर्माण एवं सुधार कार्य प्रभावित हुए थे। मामले में समग्र शिक्षा विभाग को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया है ताकि बच्चों के लिए सुरक्षित भवन की व्यवस्था जल्द सुनिश्चित हो सके।

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