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छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों के आरक्षण और अतिथि व्याख्याता नीति-2026 को दी मंज़ूरी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Umesh Ratre / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने राज्य के तीन प्रमुख विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण लागू करने से जुड़े नए नियमों को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके तहत पुलिस विभाग, वन विभाग तथा जेल विभाग की तृतीय श्रेणी नियुक्तियों में पूर्व अग्निवीर सैनिकों को आरक्षण का सीधा लाभ दिया जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम-2026’ को मंज़ूरी दी गई। पूर्व में राज्य मंत्रिपरिषद ने 22 जुलाई को तृतीय श्रेणी के इन पदों पर दस प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध कराने का नीतिगत निर्णय लिया था। अब उस फैसले को औपचारिक रूप से लागू करने के उद्देश्य से सेवा शर्तें, भर्ती मापदंड, चयन व्यवस्था और नियुक्ति से संबंधित विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

मंत्रिमंडल ने इसी बैठक में शासकीय महाविद्यालयों में अध्यापन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अतिथि व्याख्याताओं की संशोधित नीति-2026 को भी अनुमोदित किया है। इस संशोधित नीति के प्रावधानों के अनुसार, यदि चयन की मेरिट सूची में एक ही वर्ग के दो अभ्यर्थियों के प्राप्तांक बराबर पाए जाते हैं, तो छत्तीसगढ़ के मूल निवासी उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, राजकीय विश्वविद्यालयों में पूर्व में किए गए अध्यापन कार्य के अनुभव को भी अब मेरिट गणना में स्थान दिया जाएगा।

नए दिशानिर्देशों के तहत अनुभव मद में तय अधिकतम 30 अंकों में से किसी राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम पाँच माह पढ़ाने पर पाँच अंक प्रदान किए जाएंगे। पहले विश्वविद्यालय स्तर के इस अनुभव का ऐसा लाभ स्पष्ट रूप से तय नहीं था। इसके साथ ही, शासकीय महाविद्यालयों अथवा राजकीय विश्वविद्यालयों से पूर्व में कार्यमुक्त किए गए अतिथि व्याख्याताओं को रिक्त पदों पर पुनरावृत्ति का अवसर मिलेगा। उनके मानदेय भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब कालखंड के स्थान पर कार्य दिवसों की संख्या के आधार पर भुगतान किया जाएगा। सरकार ने अतिथि व्याख्याताओं के कार्य, समय सीमा और आकस्मिक अवकाश के मानक भी तय कर दिए हैं।

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