छत्तीसगढ़ में भूमि विकास नियमों में संशोधन, जमीन उपयोग के लिए नेगेटिव लिस्ट मॉडल लागू

छत्तीसगढ़ में व्यापारिक सुगमता और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जमीन उपयोग संबंधी नियमों में व्यापक संशोधन किया गया है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में बदलाव किए हैं। आपत्तियों और सुझावों के निराकरण के बाद इस संशोधन को बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किया गया। केंद्र सरकार के अनुपालन बोझ घटाने के सुधारों के तहत यह कदम उठाया गया है।
राजपत्रित प्रावधानों के तहत नियम 38 के उप-नियम (1) को संशोधित कर नेगेटिव लिस्ट मॉडल को लागू किया गया है। अब पूर्व निर्धारित अनुमति सूची पर निर्भर रहने के बजाय यह सिद्धांत तय हुआ है कि जो काम प्रतिबंधित सूची में नहीं हैं, वे स्वतः मान्य होंगे। अधिकारियों के मुताबिक इससे बदलती जरूरतों के हिसाब से नए उद्यमों और नागरिक सेवाओं के लिए जमीन के इस्तेमाल में प्रशासनिक अड़चनें कम होंगी।
संशोधन के माध्यम से भू-उपयोग को सात मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है। इनमें आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और कृषि क्षेत्र शामिल हैं। शासन ने प्रत्येक वर्ग के लिए वर्जित गतिविधियों की सीमाएं अलग-अलग निर्धारित की हैं।
आवासीय क्षेत्रों में हरी, नारंगी और लाल श्रेणी के कल-कारखाने, गैस गोदाम, कबाड़खाने, संक्रामक रोगों के चिकित्सालय, कारागार, थोक व्यापार केंद्र, तेल डिपो, पेट्रोलियम अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्रियों का भंडारण, बड़े परिवहन टर्मिनल, डेयरी, कचरा निपटान, पशु-मत्स्य पालन और खनन पर पूरी रोक रहेगी। वहीं वाणिज्यिक भूखंडों पर लाल, नारंगी और नीली श्रेणी के संयंत्र, खतरनाक या जहरीले रसायनों का संचय, विस्फोटक सामग्री, डेयरी, वध संस्कार, कब्रिस्तान संबंधी कार्य और खनन संचालित नहीं किए जा सकेंगे।
औद्योगिक क्षेत्रों के संबंध में तय किया गया है कि विशेष आवासीय टाउनशिप को छोड़कर वहां सामान्य रिहायशी कॉलोनियां, स्कूल, संक्रामक अस्पताल, जेल, थोक व्यापार, गैस गोदाम, पशुपालन और कचरा प्रबंधन जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, सार्वजनिक-अर्ध सार्वजनिक, आमोद-प्रमोद, परिवहन और कृषि भूमि पर भी विशिष्ट रोक लागू रहेगी।