छत्तीसगढ़ में ट्रांसफर पर लगी रोक हटी, नई तबादला नीति की राह खुली

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थानांतरण पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद विभिन्न विभागों में नियमित तबादलों की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। कांग्रेस ने तबादला नीति न आने के मुद्दे पर राज्य सरकार की आलोचना की थी।
इससे पहले भूपेश बघेल सरकार ने अगस्त 2022 में कोरोनाकाल के बाद दो वर्षों से चले आ रहे स्थानांतरण बैन को खत्म किया था। तब मुख्यमंत्री बघेल ने तीन प्रमुख बिंदुओं के आधार पर नई तबादला नीति को अनुमोदन दिया था।
पहला बिंदु जिला स्तर से जुड़ा था — 16 अगस्त 2022 से 10 सितंबर 2022 तक तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के स्थानांतरण जिले के प्रभारी मंत्री की स्वीकृति से कलेक्टर द्वारा किए जाने थे। दूसरे बिंदु के अनुसार राज्य स्तर पर 10 सितंबर 2022 से 30 सितंबर 2022 तक स्थानांतरण होने थे, जिसमें प्रथम व द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत और तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत तक तबादले विभागीय मंत्री की मंजूरी से हो सकते थे। तीसरा बिंदु स्कूल शिक्षा विभाग के लिए विशेष था — ऐसे किसी भी तबादले की अनुमति नहीं थी जिससे कोई स्कूल शिक्षकविहीन हो जाए या किसी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से ऊपर या 20 से नीचे चला जाए।
इस पूरे इतिहास से पहले, कोरोनाकाल में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर में पत्रकारों से चर्चा में स्पष्ट किया था कि उस दौर में व्यापक तबादले उचित नहीं होंगे, और तब समन्वय के माध्यम से ही सीमित स्थानांतरण किए जा रहे थे।
एक अलग निर्णय में, छत्तीसगढ़ सरकार ने जनगणना कार्य में तैनात कर्मचारियों के स्थानांतरण पर विशेष रोक लगाई थी, जो केवल उन्हीं कर्मचारियों पर लागू थी।
राज्य में सामान्यतः जून-जुलाई के महीनों में तबादला नीति जारी होती रही है। इसके अंतर्गत जिले के भीतर से लेकर अंतरजिला स्तर तक प्रशासनिक, स्वयं के व्यय पर और समन्वय से — तीनों प्रकार के तबादले होते आए हैं। कर्मचारी संगठन नई तबादला नीति की मांग लंबे समय से उठाते रहे हैं।