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छत्तीसगढ़ में धान सूखत पर सरकार का रुख, संग्रहण केंद्रों में कमी पर उठे सवाल

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Yann / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कार्यालय ने धान भंडारण व्यवस्था में सूखत, चूहों और कीटों से होने वाले नुकसान को एक स्वाभाविक तथा वैज्ञानिक प्रक्रिया बताया है। शासन के अनुसार नमी में कमी, तापमान, भंडारण की समयावधि और परिवहन की वजह से धान के वजन में आंशिक गिरावट आती है। इसे तकनीकी शब्दावली में मॉइस्चर लॉस अथवा ड्रायिंग लॉस कहा जाता है। प्रशासन का कहना है कि धान की यह कमी देश के सभी उत्पादक राज्यों में दर्ज की जाती है और इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

सरकारी अभिलेखों का हवाला देते हुए बताया गया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में 6.32 प्रतिशत और वर्ष 2020-21 में 4.17 प्रतिशत सूखत दर्ज हुई थी। वहीं खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 3.49 प्रतिशत सूखत का अनुमान रखा गया है। शासन का दावा है कि केंद्रों पर डिजिटल स्टॉक एंट्री, वजन सत्यापन, गुणवत्ता परीक्षण, गोदाम ट्रैकिंग तथा उठाव की निगरानी से व्यवस्था पारदर्शी बनी है। जहां यह कमी प्राकृतिक सीमा में रहती है उसे सामान्य माना जाता है, जबकि असामान्य रूप से अधिक अंतर आने पर उत्तरदायित्व तय कर जांच की जाती है।

दूसरी ओर कवर्धा स्थित चारभाटा सरकारी संग्रहण केंद्र में वित्तीय वर्ष 2024-25 के भंडारण में से लगभग 26,000 क्विंटल धान रिकॉर्ड से गायब पाया गया है। बाजार में इस मात्रा का अनुमानित मूल्य करीब 7 करोड़ रुपये बताया गया है। भंडारण केंद्र के जिम्मेदारों द्वारा चूहों के कारण नुकसान का हवाला दिए जाने के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू की गई है। इसके अलावा धान उपार्जन व्यवस्था में गड़बड़ी की शिकायतों पर शासन ने 12 जिलों में कार्रवाई करते हुए 38 कर्मचारियों पर दंडात्मक कदम उठाए हैं।

जनसंपर्क विभाग और शासन द्वारा प्रस्तुत विवरण के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक 17,77,419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इसके भुगतान के रूप में कृषकों को 23,448 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि डिजिटल टोकन और ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से पूरी उपार्जन प्रणाली को व्यवस्थित बनाया गया है।

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