छत्तीसगढ़ वन विभाग में 3,630 संविदा कर्मियों को नियमित करने की तैयारी, चार सदस्यीय जांच समिति गठित

छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अपने अधीन कार्यरत 3,630 संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की प्रशासनिक कवायद तेज कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद विभागीय स्तर पर अधिसूचना जारी की गई है। इस पूरे मामले में पात्र कर्मचारियों की समीक्षा और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए शासन ने चार सदस्यीय समिति का गठन किया है।
आधिकारिक आदेश के अनुसार उन सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित सेवा में शामिल करने का निर्णय लिया गया है, जिन्होंने विभाग में 10 वर्ष अथवा उससे अधिक की कार्य अवधि पूरी कर ली है। इस व्यवस्था के अंतर्गत कुल 3,630 पदों का चिन्हांकन हुआ है। इनमें तृतीय श्रेणी के 966 पद तथा चतुर्थ श्रेणी के 2,664 पद शामिल किए गए हैं।
वन विभाग में कार्यभारित और आकस्मिकता निधि से मानदेय प्राप्त करने वाले अमले के लिए ‘भर्ती तथा सेवा शर्तें नियम, 2024’ लागू करने की रूपरेखा तैयार की गई थी। सामान्य प्रशासन विभाग के अनुमोदन के पश्चात इन नियमों को अंतिम स्वरूप दिया जा रहा है। वर्षों से दैनिक वेतन या अन्य अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे अमले को सेवा सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।
गठित की गई चार सदस्यीय समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पंद्रह दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस समिति में रायपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मणिवासगन एस. और गरियाबंद के वनमंडलाधिकारी मयंक पाण्डेय को सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उप वन संरक्षक रौनक गोयल को समिति के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार समिति की अनुशंसाएं प्राप्त होने के बाद पात्र अमले की सूची को अंतिम रूप देकर नियमितीकरण की शेष औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।