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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग: संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत गठित संस्था जो राज्य भर्ती प्रक्रिया की केंद्रीय कड़ी है

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भारतीय संविधान के भाग XIV के अनुच्छेद 315 के अंतर्गत 23 मई 2001 को स्थापित हुआ। उल्लेखनीय है कि राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश के कुछ जिलों को पृथक कर हुआ था, और राज्य बनने के लगभग सात माह बाद ही आयोग अस्तित्व में आया। आयोग का मुख्यालय नवा रायपुर अटल नगर के नॉर्थ ब्लॉक, सेक्टर-19 में है, जिसका पिन कोड 492002 और संपर्क नंबर 0771-2331204 है।

आयोग छत्तीसगढ़ सरकार और राज्यपाल की देखरेख में कार्य करता है। सदस्यों की नियुक्ति एवं पदमुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास है और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल नियुक्ति तिथि से छह वर्ष निर्धारित है। विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Rita Shandilya आयोग की अध्यक्ष हैं। Shri Pushpendra Kumar Meena (I.A.S.) सचिव पद पर हैं, जबकि Dr. Sarita Uike और Er. Santkumar Netam सदस्य के रूप में कार्यरत हैं।

आयोग के संवैधानिक दायित्वों में प्रतियोगी एवं विभागीय परीक्षाओं का आयोजन, पात्र अभ्यर्थियों के साक्षात्कार व स्क्रीनिंग परीक्षण, चयनित उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया का संचालन, सेवा नियमों का निर्धारण तथा राज्य सरकार को परामर्श देना शामिल है।

ऑनलाइन आवेदन के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट psc.cg.gov.in पर सेवाएँ उपलब्ध हैं। नए अभ्यर्थियों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की व्यवस्था है, जबकि पहले से पंजीकृत उम्मीदवार सीधे लॉगिन कर सकते हैं। आयोग की वेबसाइट पर स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी को पंजीकरण केवल एक बार ही कराना होगा।

आयोग राज्य की नागरिक सेवाओं से जुड़े समस्त मामलों का निपटारा करता है। संविधान प्रदत्त स्वायत्तता और राज्यपाल के प्रति उत्तरदायित्व के कारण यह संस्था सरकारी भर्तियों में प्रक्रियागत निष्पक्षता की संरचनात्मक गारंटी मानी जाती है।