दुर्ग ज़िला पंचायत में 16वें वित्त आयोग की राशि वितरण पर विवाद, कांग्रेस समर्थित सदस्यों ने कलेक्टर से की जाँच की माँग

दुर्ग ज़िला पंचायत में 16वें वित्त आयोग की राशि के आवंटन को लेकर मतभेद गहरा गया है। कांग्रेस समर्थित पाँच ज़िला पंचायत सदस्यों ने 16 सितंबर को कलेक्टर से मुलाक़ात कर इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा। सदस्यों ने राशि वितरण सूची की वैधानिकता, प्रक्रिया और आबंटन के आधार की निष्पक्ष प्रशासनिक जाँच कराने की माँग रखी है। इसके साथ ही उन्होंने जाँच निष्कर्ष आने तक संबंधित मद से प्रशासनिक स्वीकृति, कार्यादेश, निविदा और भुगतान की समस्त प्रक्रियाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का अनुरोध किया है।
सदस्यों के अनुसार, ज़िला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक 11 सितंबर को आयोजित की गई थी, जिसमें इस राशि के आबंटन का प्रस्ताव पारित किया गया था। सदस्यों का आरोप है कि पारित प्रस्ताव में ज़िला पंचायत अध्यक्ष के लिए 59,81,178 रुपये, उपाध्यक्ष के लिए 54,81,177 रुपये तथा कुछ अन्य सदस्यों के लिए 53,81,177 रुपये की राशि तय की गई। इसके विपरीत, पाँच कांग्रेस समर्थित सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्रों के लिए महज़ 10-10 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। सदस्यों ने सवाल उठाया है कि आबंटन की इस भारी असमानता का मापदंड क्या है।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सदस्यों को 16 एफएफसी डिस्ट्रीब्यूशन लिस्ट - रिसोर्स एनवेलप-46598147 शीर्षक से एक सूची प्राप्त हुई है। इस दस्तावेज़ में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम के आगे पृथक-पृथक धनराशि दर्ज है। सदस्यों ने माँग की है कि सार्वजनिक धन के विभाजन में जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, स्थानीय आवश्यकता अथवा प्रस्तावित कार्यों की संख्या जैसे ठोस आधार स्पष्ट किए जाने चाहिए।
प्रतिनिधियों ने सामान्य सभा की कार्यसूची, प्रस्ताव क्रमांक, उपस्थिति पंजी और मतदान प्रक्रिया के वैधानिक पहलुओं की भी समीक्षा करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि 16वां वित्त आयोग वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए स्थानीय निकायों के अनुदान की अनुशंसा करता है। ऐसे में ज़िला पंचायत स्तर पर सदस्यवार राशि निर्धारण किस सरकारी नियम या दिशा-निर्देश के तहत किया गया, इसकी स्पष्ट व्याख्या आवश्यक है।