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पंडवानी गायिका तीजन बाई का रायपुर एम्स में निधन, राजकीय सम्मान के साथ मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Zoshua Colah / Unsplash

पंडवानी की ओजस्वी कोकिला के रूप में पहचानी जाने वाली तीजन बाई का रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। उनके जाने से लोककला जगत में गहरा शोक छा गया।

मुक्तिधाम में उनके अंतिम संस्कार के समय वातावरण गमगीन रहा। वहाँ उपस्थित लोगों ने 'चोला माटी के हे राम' गीत गाकर उन्हें अंतिम विदाई दी। यह संस्कार राजकीय सम्मान के साथ पूरा किया गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि लोककला को अपूरणीय क्षति पहुँची है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एम्स पहुँचे और वहाँ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पंडवानी गायन परंपरा की प्रतिनिधि कलाकार थीं। उनके निधन की सूचना फैलते ही प्रदेशभर में शोक की लहर उठी। कलाकारों, साहित्यकारों और आम नागरिकों ने अपनी-अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद किया।

तीजन बाई की विरासत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी रही है। उनके जाने के बाद पंडवानी की इस विशिष्ट परंपरा के संरक्षण की जिम्मेदारी और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। प्रदेश की सांस्कृतिक संस्थाओं तथा सरकार के सामने इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की चुनौती अब पहले से कहीं बड़ी है।