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पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में प्रवेश न मिलने पर छात्रों का विरोध, सौंपा ज्ञापन

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Rajesh12 / Wikimedia Commons (CC BY 3.0)

छत्तीसगढ़ में राज्य शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के उपरांत भी पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं को अगली कक्षाओं में प्रवेश लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरे और तीसरे वर्ष तथा तीसरे और पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थी दाखिला प्रक्रिया बाधित होने से परेशान हैं। इस प्रशासनिक समस्या के निराकरण के लिए नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के विश्वविद्यालय अध्यक्ष पुनेश्वर लहरे की अगुवाई में प्रतिनिधियों ने परिसर पहुंचकर अधिकारियों को ज्ञापन दिया।

छात्र नेताओं ने बताया कि शासन की ओर से आगामी सत्र और सेमेस्टर में प्रवेश देने का लिखित आदेश पहले ही जारी हो चुका है। इसके बावजूद महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को दाखिले के लिए भटकना पड़ रहा है। क्रेडिट स्कोर के नियमों का हवाला देकर बीए एलएलबी सहित कई अन्य पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को द्वितीय और तृतीय वर्ष में जाने से रोका जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने आशंका जताई कि यदि इस बाधा को तत्काल नहीं हटाया गया, तो बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक सत्र प्रभावित होगा।

विश्वविद्यालय परिसर में ज्ञापन देने पहुंचे छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति और कुलसचिव की अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी दर्ज कराई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करते हुए दाखिले की प्रक्रिया फौरन शुरू नहीं की गई, तो परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस दल और विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक दल ने छात्र नेताओं के साथ चर्चा की और इस समस्या का त्वरित समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। इस आश्वासन के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने अपना प्रस्तावित धरना स्थगित करने का निर्णय लिया।

छात्र संगठन ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति और उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर शासन के आदेश को पूरी तरह लागू करने की मांग की। संगठन ने आग्रह किया कि क्रेडिट स्कोर के आधार पर विद्यार्थियों को आगामी कक्षाओं में जाने से न रोका जाए और सभी संबद्ध संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया तुरंत सुचारू की जाए। इस दौरान अंकित बंजारे, लोकेश चंद्रा, विल्सन और भागवत सहित कई अन्य प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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