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बस्तर दशहरा में भीतर रैनी रस्म के दौरान विजय रथ के नीचे आने से ग्रामीण की मौत

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Raghvendra Pratap Singh / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

बस्तर दशहरा पर्व के भीतर रैनी विधान के दौरान बुधवार देर रात बड़ा हादसा हुआ। आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ के पहिए के नीचे आ जाने से एक अज्ञात ग्रामीण की मौके पर ही जान चली गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना घटते ही रथ की परिक्रमा तत्काल प्रभाव से रोक दी गई। घायल ग्रामीण को पैर कुचल जाने के कारण फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार भीतर रैनी के अवसर पर देर रात रथ चुराने की पारंपरिक रस्म पूरी की जाती है। इसी विधान में भाग लेने के लिए किलेपाल परगना अंतर्गत आने वाले 32 गांवों के दो हजार से अधिक ग्रामीण राजमहल परिसर में जुटे थे। विधि-विधान से पूजा संपन्न होने के उपरांत ग्रामीण इस भारी-भरकम आठ पहिया रथ को खींचते हुए कुम्हड़ाकोट के जंगलों की तरफ ले जा रहे थे।

सिरहासर भवन के समीप पहुंचते ही रथ खींच रही भारी भीड़ का संतुलन अचानक डगमगा गया। इसी आपाधापी में एक युवक का पांव फिसल गया और दो लोग सीधे रथ के भारी पहिए के नीचे फंस गए। आसपास मौजूद जनसमूह जब तक बचाव की कोई तरकीब निकाल पाता, तब तक विशाल पहिया उन्हें रौंदता हुआ आगे निकल गया। हादसे में मृत व्यक्ति की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

घटनास्थल पर माकूल रोशनी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने का दावा करते हुए आक्रोशित लोगों ने देर रात जमकर हंगामा खड़ा कर दिया। स्थिति तनावपूर्ण होते देख पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने उग्र ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाया और हालात पर काबू पाया। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर पूरे मामले की विधिवत छानबीन शुरू कर दी है।

इस दुखद घटना के पश्चात जगदलपुर प्रशासन ने सुरक्षा तंत्र को कड़ा करने के निर्देश दिए हैं। नए प्रशासनिक आदेश के तहत रथ संचालन के दौरान उसके आगे तथा पीछे पंद्रह-पंद्रह मीटर का क्षेत्र पूरी तरह रिक्त रखा जाएगा। इस खाली दायरे को बनाए रखने के लिए मौके पर सुरक्षा बलों और स्वयंसेवकों की मदद से मानवीय श्रृंखला तैयार की जाएगी।

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