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बालोद में 15 नवंबर से 161 केंद्रों पर शुरू होगी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Jacob / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

बालोद जिले में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य आरंभ होगा, जो आगामी 15 जनवरी तक संचालित रहेगा। जिला प्रशासन ने इस वर्ष कुल 161 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से उपज क्रय करने की पूरी रूपरेखा तय कर ली है। ग्राम मटिया बी में नवीन उपार्जन केंद्र की मंजूरी मिलने के उपरांत जिले में खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़कर 161 हो गई है। जिला नोडल अधिकारी सीआर रावटे के अनुसार इसी खरीफ सत्र से मटिया बी केंद्र में भी धान क्रय की प्रक्रिया विधिवत शुरू कर दी जाएगी।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के अंतर्गत जिले में अब तक 5,807 नए कृषकों ने अपना पंजीयन दर्ज कराया है। गत खरीफ सत्र में नवीन पंजीकृत काश्तकारों की यह संख्या 6,297 दर्ज की गई थी। शासन ने किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए उपार्जन हेतु पंजीयन कराने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर से आगे बढ़ाकर 15 नवंबर निर्धारित कर दी है। इस संबंध में जिले की समस्त प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों के प्रमुखों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रेषित किए जा चुके हैं।

संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में अपर कलेक्टर सुरेंद्र प्रसाद वैद्य ने सभी विभागीय अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर संपूर्ण तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा। खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से भूमि के रकबे के आधार पर टोकन जारी करने का फैसला लिया गया है। व्यवस्था के तहत दो एकड़ से कम रकबा धारक कृषकों को केवल एक टोकन दिया जाएगा। वहीं दो से लेकर दस एकड़ तक की जोत वाले किसानों को अधिकतम दो टोकन तथा दस एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को अधिकतम तीन टोकन प्रदान किए जाएंगे।

उपार्जन प्रक्रिया में बारदानों की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए नए और पुराने बोरों का इस्तेमाल बराबर यानी पचास-पचास प्रतिशत के अनुपात में होगा। पुराने बारदानों का प्रबंध सार्वजनिक वितरण प्रणाली, संबंधित समितियों और राइस मिलर्स के जरिए किया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक उपार्जन स्थल पर गुणवत्ता जांचने के लिए पीसीएसएपी के माध्यम से धान की ग्रेडिंग अनिवार्य रूप से की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि खरीफ वर्ष 2025-26 में नागरिक आपूर्ति निगम के पास तय पचास प्रतिशत चावल जमा करने वाले राइस मिलर्स ही वर्ष 2026-27 के कस्टम मिलिंग अनुबंध के पात्र होंगे।

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