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सक्ती ज़िले में 778.6 मिमी औसत वर्षा दर्ज, देश भर में मानसून की वापसी 15 सितंबर से संभावित

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: amarujala.com

छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले में चालू मानसूनी मौसम के दौरान अब तक 778.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। जनसंपर्क विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार ज़िले के विभिन्न वर्षामापी केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह औसत स्तर संकलित हुआ है।

इधर राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी को लेकर नया आकलन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत से मानसूनी हवाओं की विदाई 15 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापसी के अनुकूल मौसमी परिस्थितियां बनने लगी हैं।

सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून एक जून को केरल तट पर पहुंचता है और आठ जुलाई तक समूचे देश को अपने दायरे में ले लेता है। इसके बाद उत्तर-पश्चिम भारत से इसकी विदाई आमतौर पर 17 सितंबर के आसपास आरंभ होकर 15 अक्तूबर तक देश भर में पूरी होती है। इस वर्ष मानसून 24 मई को ही केरल पहुंच गया था, जो वर्ष 2009 के बाद सबसे शुरुआती आगमन रहा। इसके अलावा मानसूनी हवाओं ने सामान्य तारीख से नौ दिन पहले ही पूरे देश को आच्छादित कर लिया, जो वर्ष 2020 के बाद सबसे तेज़ गति रही।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 836.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य औसत 778.6 मिलीमीटर की तुलना में सात प्रतिशत अधिक है। मई में विभाग ने समूचे मौसम में 87 सेंटीमीटर के दीर्घावधि औसत की 106 फीसदी वर्षा का अनुमान व्यक्त किया था। कृषि क्षेत्र के लिए मानसूनी वर्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह देश की करीब 42 प्रतिशत आबादी की आजीविका का माध्यम है और सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश का असर भी देखा गया है। सिक्किम के ग्यालशिंग ज़िले के रिम्बी क्षेत्र में भूस्खलन की चपेट में आने से एक मकान ढह गया, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई और एक बच्चा सुरक्षित निकाला गया। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लिए भी वर्षा की चेतावनी जारी की है।

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