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सरगुजा: स्टाम्प पेपर पर वनाधिकार भूमि बेचने पर सात पट्टे निरस्त, वन विभाग ने दिया बेदखली का नोटिस

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Harminder Singh Saini / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

सरगुजा जिले के महामाया पहाड़ से सटे बधियाचुआं और खैरबार इलाके में वन अधिकार पत्र के जरिए मिली जमीन को नियम विरुद्ध बेचने का मामला सामने आया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने जांच में पुष्टि होने के बाद सात पट्टेदारों के अधिकार पत्र निरस्त कर दिए हैं। विभाग ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जमीन तुरंत खाली करने को कहा है।

वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2016 में कई हितग्राहियों को दो-दो एकड़ के वन अधिकार पट्टे दिए गए थे। नियमों के मुताबिक इस भूमि का क्रय-विक्रय अथवा वैधानिक पंजीयन नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कुछ लोगों ने स्टाम्प पेपर के सहारे दस से पंद्रह डिसमिल भूमि एक से दो लाख रुपये में दूसरों को बेच दी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमीन खरीदने वालों में दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल हैं।

सरगुजा के वनमंडलाधिकारी पंकज कमल ने बताया कि खैरबार निवासी हरमुनिया, सुधीर राज चौहान, मेरी फीलिसीता और बालरुप तथा बधियाचुआं निवासी कल्याण कुजूर, रायल्लो बाई एवं बसंती के नाम आवंटित पट्टे रद्द किए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर इन सभी को नोटिस देकर जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया है। तय समय पर कब्जा नहीं छोड़ने की स्थिति में प्रशासनिक स्तर पर बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय जांच दल को खैरबार, बधियाचुआं और डबरी पानी क्षेत्र में वन भूमि पर 468 अन्य अवैध अतिक्रमण भी मिले हैं। इस संबंध में शासन को पूरी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। स्थानीय पार्षद आलोक दुबे ने शासन और वन विभाग से वन अधिकार पट्टों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और समूचे इलाके से अवैध कब्जे खाली कराने की मांग की है। उधर, बेदखली की जद में आए लोग रहने का ठिकाना न होने की बात कहकर कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

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