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सामुदायिक वन अधिकार: नोडल एजेंसी विवाद पर आदेश रद्द करने की माँग, आदिवासियों का विरोध

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: news18.com

छत्तीसगढ़ में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की मान्यता को लेकर प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विवाद सामने आया है। वन विभाग ने स्वयं को नोडल एजेंसी का दायित्व सौंपने संबंधी एक परिपत्र जारी किया था। इसके विरोध में उतरे आदिवासी संगठनों और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन का काम आदिवासी कार्य मंत्रालय और राज्यों में आदिवासी विकास विभाग देखता रहा है। यह कानून मूल रूप से आदिवासियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के अधिकारों से जुड़ा है। ऐसे में आदिवासी विकास विभाग ही इसके क्रियान्वयन के लिए अधिकृत है। संगठन का आरोप है कि वन विभाग ने इस व्यवस्था को दरकिनार करते हुए स्वयं को सामुदायिक वन अधिकार का नोडल विभाग बनाने का कदम उठाया है।

विवादित आदेश 15 मई 2025 का बताया गया है, जिसमें 28 मई 2020 के एक पुराने सरकारी निर्णय को आधार बनाया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूर्ववर्ती निर्णय को भारी जनविरोध के कारण सरकार पहले ही वापस ले चुकी थी। उनका तर्क है कि निरस्त आदेश के सहारे नया पत्र जारी करना वनाधिकार मान्यता कानून 2006 का उल्लंघन है और यह आदिवासी विकास विभाग के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण है।

जारी आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के टी.एन. गोदावर्मन वाद और नेशनल वर्किंग प्लान कोड 2023 का हवाला देकर केवल वैज्ञानिक प्रबंधन मान्य होने की बात कही गई थी। इसमें वन विभाग के अतिरिक्त किसी अन्य संस्था द्वारा प्रबंधन कार्य न करने की चेतावनी दी गई थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि ग्राम सभाएँ और उनकी सामुदायिक वन अधिकार प्रबंधन समितियाँ ही वनों का संरक्षण करती हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत ग्राम सभाओं को संरक्षण और संवर्धन के लिए 15 लाख रुपये देने की व्यवस्था कर रही है।

इधर रायपुर में जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्राम सभाओं के लिए आजीविका संवर्धन पर दो दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित हुई। प्रदर्शनकारी संगठनों ने माँग रखी है कि 15 मई 2025 के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए, आदिवासी विकास विभाग को ही नोडल एजेंसी बनाए रखने का लिखित आश्वासन मिले और ग्राम सभाओं द्वारा तैयार योजनाओं को मान्यता दी जाए।

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