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साय कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के प्रारूप को दी मंजूरी, कई अन्य संशोधन प्रस्ताव भी स्वीकृत

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: VishuN / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य दबाव, प्रलोभन, बल प्रयोग अथवा कपटपूर्ण उपायों से कराए जाने वाले धर्मांतरण की रोकथाम करना है।

प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार अवैध धर्मांतरण से जुड़े सभी अपराध संज्ञेय तथा गैर-जमानती श्रेणी में रखे जाएंगे। सामान्य रूप से अवैध धर्मांतरण कराने के मामलों में सात से दस वर्ष के कारावास के साथ न्यूनतम पांच लाख रुपये के अर्थदंड की व्यवस्था की गई है। नाबालिगों, महिलाओं या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों का अवैध धर्मांतरण कराने पर दस से बीस वर्ष की जेल और कम से कम दस लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया है। सामूहिक स्तर पर होने वाले धर्मांतरण के मामलों में दस वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा न्यूनतम पच्चीस लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। विधेयक में यह भी साफ किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म में पुनः लौटता है, तो उसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।

विधेयक के प्रावधानों के तहत स्वेच्छा से मतांतरण चाहने वाले व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी, जिस पर तीस दिनों के भीतर सार्वजनिक आपत्ति प्रस्तुत की जा सकेगी। इसके तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की व्यवस्था प्रस्तावित है।

मंत्रिपरिषद ने कई अन्य नीतिगत प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। बैठक में छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया, जिसका उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता और शुचिता स्थापित करना है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम 1972 (संशोधन) विधेयक 2026, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल विधेयक 2026 और छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 40, 50 एवं 59 में संशोधन के प्रारूप भी स्वीकृत किए गए।

प्रशासनिक फैसलों के तहत राजनांदगांव जिला क्रिकेट एसोसिएशन को खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी तैयार करने हेतु राजगामी संपदा की पांच एकड़ भूमि आबंटित करने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त पंजीयन पर प्रभार्य उपकर शुल्क समाप्त करने का फैसला भी हुआ।

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