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छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टैक किसान रजिस्ट्री: संयुक्त भूमि खाते के हर सह-खातेदार का अलग पंजीयन अनिवार्य, 31 अक्टूबर अंतिम तारीख

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Aditya Mahar / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन और विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ उठाने के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर किसान पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार इस डिजिटल व्यवस्था में आवेदन की प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू हुई है और अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है। संयुक्त अथवा पुश्तैनी भूमि खाते में दर्ज सभी खसरों के प्रत्येक सह-खातेदार का स्वतंत्र डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद ही संबंधित किसान अपनी हिस्सेदारी की उपज सरकारी समितियों में बेच सकेंगे।

राजस्व विभाग और कृषि विभाग के निर्देशों के तहत संयुक्त परिवारों की जमीन में दर्ज भाई, बहन, बेटियों सहित सभी हिस्सेदारों की अलग डिजिटल पहचान बनाई जा रही है। व्यवस्था के अनुसार केवल परिवार के मुखिया का पंजीयन मान्य नहीं होगा, बल्कि ऋण पुस्तिका में दर्ज सभी खसरों पर प्रत्येक हिस्सेदार का विवरण देना होगा। यदि कोई सह-खातेदार नाबालिग है, तो उसका स्वतंत्र नामांकन न होकर उसके संरक्षक का विवरण दर्ज किया जाएगा। जिस सह-खातेदार का पंजीयन नहीं होगा, उसके हिस्से की उपज सरकारी खरीद में शामिल नहीं की जाएगी।

आंकड़ों के अनुसार राज्य में पहले 41,06,694 किसानों का रिकॉर्ड दर्ज था। सभी सह-खातेदारों के अलग नामांकन के कारण प्रदेश के 17 जिलों में किसानों की कुल संख्या प्रारंभिक लक्ष्य से 3,89,617 अधिक पहुंच गई है। प्रशासनिक विवरण के अनुसार कई जिलों में पंजीयन कार्य अभी शेष है। इनमें सक्ती में सर्वाधिक 1,31,578, गरियाबंद में 1,01,302 और जांजगीर-चांपा में 76,865 पंजीयन लंबित हैं। इसके अलावा कोरबा में 22,167, बलरामपुर-रामानुजगंज में 20,578, कांकेर में 14,094, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 10,288, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 8,532, राजनांदगांव में 7,060, जीपीएम में 5,917, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 5,798, कोंडागांव में 3,614, सूरजपुर में 2,838, रायगढ़ में 1,714, कोरिया में 542 और जशपुर में 223 प्रकरण शेष हैं।

प्रशासन का कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड से किसान की पहचान जोड़कर बनने वाली यूनिक फार्मर आईडी से दोहरे पंजीयन और एक ही भूमि पर कई बार लाभ लेने जैसी विसंगतियों पर रोक लगेगी। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह ठाकुर ने इस व्यवस्था को सकारात्मक बताते हुए कहा कि सह-खातेदारों के बीच विवाद की स्थिति में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी पात्र किसान धान बेचने से वंचित न रहे।

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