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खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में धान क्षति का होगा भौतिक सर्वेक्षण, प्रशासन ने 25 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Bishnu Sarangi / Wikimedia Commons (CC0)

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई ज़िले में वर्षा के अभाव के चलते खेतों में दरारें उभरने, जलस्रोतों के सूखने और धान की खेती प्रभावित होने के मामलों को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने फसल क्षति के आकलन की पहल की है। ज़िला कलेक्टर ने क्षेत्र के सभी तहसीलदारों को निर्देश जारी कर मैदानी स्तर पर फसलों के नुकसान का जायज़ा लेने के लिए विशेष संयुक्त जांच दल गठित करने को कहा है।

प्रशासनिक व्यवस्था के तहत बनाए जा रहे इस संयुक्त दल में संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और पंचायत सचिव को शामिल किया गया है। इस दल को गांवों में जाकर खेतों का भौतिक सत्यापन करना होगा। सर्वेक्षण के दौरान प्रत्येक गांव में कुल बोए गए रकबे के साथ-साथ सूखे व कम वर्षा से प्रभावित फसल क्षेत्र का स्पष्ट ब्योरा तय प्रारूप में दर्ज किया जाएगा। जांच दल को 25 सितंबर तक यह पूरी कार्यवाही समाप्त कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपने का समय दिया गया है।

ज़िले में वर्षा की स्थिति को लेकर प्रशासनिक आंकड़ों और किसानों की ओर से बताई जा रही मैदानी स्थिति में अंतर देखा जा रहा है। कृषि विभाग के उप संचालक राजकुमार सोलंकी के अनुसार ज़िले में वर्षा की स्थिति पर्याप्त रही है और पिछले 10 वर्षों के औसत की तुलना में अब तक लगभग 97 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। दूसरी ओर, खेतों में नमी घटने के कारण निदाई-गुड़ाई और रासायनिक खाद डालने का कार्य रुकने तथा नदी-नालों के सूखने की बातें सामने आई हैं।

राज्य के अन्य ज़िलों जैसे कोरबा और सूरजपुर में भी वर्षा की कमी और बढ़ते तापमान के कारण धान की फसल पीली पड़ने तथा जल संकट की चिंताएं बनी हुई हैं। खैरागढ़ क्षेत्र में 25 सितंबर तक पूरा होने वाला यह प्रशासनिक सर्वे तय करेगा कि ज़मीनी स्तर पर कुल बोए गए रकबे में से कितने हिस्से को वास्तव में नुकसान पहुंचा है, जिससे वास्तविक क्षति सरकारी रिकॉर्ड में शामिल हो सकेगी।

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