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खैरागढ़ में धान फसल क्षति का होगा मैदानी सर्वेक्षण, प्रशासन ने गठित किया संयुक्त दल

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Kailash Kumbhkar / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में वर्षा की कमी से धान की फसल पर असर पड़ने की शिकायतों के बाद प्रशासन ने खेतों का भौतिक निरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। कलेक्टर ने जिले के सभी तहसीलदारों को निर्देश जारी कर ग्राम स्तर पर फसल क्षति का विस्तृत सर्वेक्षण कराने को कहा है। यह पूरा कार्य पच्चीस सितंबर तक पूरा करने की समय-सीमा तय की गई है।

प्रशासनिक व्यवस्था के तहत प्रत्येक गांव के लिए एक संयुक्त जांच दल का गठन किया जा रहा है। इस दल में संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और पंचायत सचिव को शामिल किया गया है। यह दल सीधे खेतों में जाकर स्थिति की पड़ताल करेगा। इसके माध्यम से बोए गए कुल रकबे और उसमें से प्रभावित क्षेत्रफल की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संकलित की जाएगी।

खेतों में दरारें पड़ने, नदी-नालों के सूखने तथा निदाई-गुड़ाई व खाद डालने के काम रुकने की समस्या सामने आने के बाद यह प्रशासनिक पहल हुई है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य सरकारी आंकड़ों और किसानों की वास्तविक जमीनी स्थिति के अंतर को दूर करना है, ताकि सूखे की आशंका और प्रभावित फसल का सटीक ब्योरा तैयार किया जा सके।

कृषि विभाग के अनुसार जिले में मानसूनी आंकड़ों की स्थिति सामान्य के आसपास रही है। उप संचालक कृषि राजकुमार सोलंकी के मुताबिक पिछले दस वर्षों की औसत वर्षा की तुलना में जिले में अब तक लगभग सत्तानवे प्रतिशत बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद कुछ इलाकों में खेतों में नमी की कमी की बात सामने आ रही है।

राज्य के अन्य क्षेत्रों जैसे कोरबा और सूरजपुर में भी वर्षा की कमी तथा बढ़ते तापमान के कारण खेती का काम प्रभावित होने और जल संकट गहराने की खबरें हैं। वहीं मौसम विभाग ने प्रदेश के चार संभागों के लिए सतर्कता जारी करते हुए अनेक जिलों में भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है।

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