चिकित्सा और पैरामेडिकल शिक्षा निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पर नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल, राज्यपाल को भेजा पत्र

छत्तीसगढ़ में चिकित्सा और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को आयुष विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से अलग कर निजी संस्थानों को सौंपने की चल रही कवायद पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इस संबंध में राज्यपाल को एक पत्र प्रेषित कर शासन स्तर पर गतिमान इस प्रक्रिया पर अविलंब रोक लगाने का अनुरोध किया है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि आयुष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा इस प्रस्ताव पर पूर्व में ही असहमति जताई जा चुकी है। इसके बावजूद इस योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. महंत ने राज्यपाल को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि वर्षों से संचालित शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव करने से पूर्व उसके शैक्षणिक और प्रशासनिक परिणामों का विधिवत आकलन नहीं किया गया। उन्होंने आशंका जताई है कि पाठ्यक्रमों का नियंत्रण निजी विश्वविद्यालयों के पास जाने से शिक्षण शुल्क में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। शिक्षा महंगी होने का सबसे प्रतिकूल प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर तबकों और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ेगा, जिससे उनके लिए इन चिकित्सा पाठ्यक्रमों में अध्ययन करना कठिन हो जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने दोहरी प्रणाली लागू होने से परीक्षा संचालन और जारी होने वाली डिग्रियों की साख प्रभावित होने की संभावना भी व्यक्त की है। उनके अनुसार, प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा चिकित्सा, तकनीकी और पैरामेडिकल विषयों की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में नियमों में अचानक किए जाने वाले फेरबदल से विद्यार्थियों के भविष्य और प्रमाण पत्रों की वैधता को लेकर संशय की स्थिति निर्मित हो सकती है।
उन्होंने राज्यपाल से इस पूरे विषय में प्रशासनिक हस्तक्षेप करने और राज्य शासन को इस बदलाव को रोककर पूर्ववत व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। दूसरी तरफ, प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश की कार्यवाही संचालित हो रही है। विभागीय पोर्टल पर बीएएमएस, बीएचएमएस तथा बीएनवाईएस पाठ्यक्रमों की काउंसलिंग से संबंधित जरूरी दिशा-निर्देश और सूचनाएं जारी की जा चुकी हैं।