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छत्तीसगढ़ कैबिनेट: पूर्व अग्निवीरों के लिए पुलिस आरक्षक के 36 पद स्वीकृत, विभाग का नाम बदला

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Jashapd1 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में पूर्व अग्निवीर सैनिकों को सेवा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गृह विभाग में आरक्षक संवर्ग के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी प्रदान की है। यह निर्णय रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में संपन्न इस बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने निर्णयों का ब्योरा साझा किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गृह विभाग में उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के इन 36 पदों पर नियुक्तियाँ की जाएँगी। राज्य शासन द्वारा पूर्व अग्निवीर सैनिकों के लिए आरक्षक संवर्ग की भर्तियों में दस प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान पहले ही तय किया जा चुका है। नई स्वीकृति से सेना से सेवामुक्त होकर आने वाले युवाओं को राज्य के पुलिस बल में शामिल होने का सीधा अवसर मिलेगा।

मंत्रिपरिषद ने प्रशासनिक पुनर्गठन से जुड़े एक अन्य प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी। इसके तहत राज्य के ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम परिवर्तित कर अब ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा। इस बदलाव को विधिवत लागू करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन कार्य आवंटन नियम में संशोधन किया जा रहा है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में पच्चीस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक औपचारिक अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से प्रदेश में नक्सल विरोधी अभियानों में गति आई है और बस्तर क्षेत्र अब सुरक्षा तथा विकास की ओर बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार द्वारा कर हिस्सेदारी बत्तीस प्रतिशत से बढ़ाकर बयालीस प्रतिशत की गई है, जिससे राज्यों को वित्तीय संसाधन प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना और जनधन योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की भी चर्चा की।

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