योजनादुर्ग

दुर्ग : छत्तीसगढ़: चरण पादुका योजना के तहत 12.40 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा लाभ

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Harminder Singh Saini / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, राज्य में चरण पादुका योजना का दोबारा आगाज किया गया है। दुर्ग ज़िले के जामगांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों को खुद चप्पल पहनाकर इस व्यवस्था की शुरुआत की। शासकीय विज्ञप्ति में बताया गया है कि इस पहल के माध्यम से प्रदेश भर के 12 लाख 40 हजार से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को सहायता पहुंचाई जाएगी।

शासकीय बयान के मुताबिक, इस कदम का मुख्य लक्ष्य जंगलों में कठिन परिस्थितियों के बीच लघु वनोपज एकत्र करने वाले ग्रामीणों को सुरक्षा देना है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह वितरण केवल जूते-चप्पल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन वनवासियों के श्रम, स्वाभिमान और संरक्षा से जुड़ा विषय है जिनकी मेहनत पर स्थानीय आजीविका और वनोपज अर्थव्यवस्था निर्भर करती है। प्रशासन ने इस कदम को अपने चुनावी संकल्प पत्र में किए गए वादे की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत किया है।

इस योजना का ऐतिहासिक संदर्भ केंद्र सरकार के पुराने कार्यक्रमों से भी जुड़ा हुआ है। 14 अप्रैल 2018 को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 127वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजापुर प्रवास के दौरान एक जनसभा में चरण पादुका योजना के अंतर्गत एक आदिवासी महिला को नई चप्पलें पहनाई थीं। उस दौरान वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता बीनने वाले लोगों की आवाजाही को सुरक्षित और सुगम बनाने के उद्देश्य से चप्पलें उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया था। उसी मंच से प्रधानमंत्री ने वन धन योजना का शुभारंभ किया था, ग्राम स्वराज अभियान की बात कही थी और देश के पहले आयुष्मान भारत वेलनेस सेंटर की शुरुआत भी की थी।

प्रशासन का दावा है कि जंगलों से वनोपज जुटाने वाले लोगों के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें सुरक्षित परिवेश देने के लिए यह सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वनों में संग्रहण के दौरान ग्रामीणों को कांटों और पत्थरों से बचाने के लिए यह सुविधा एक बुनियादी सुरक्षा साधन के तौर पर काम करेगी।

स्रोत