छत्तीसगढ़: टाइगर रिजर्व और नगरीय क्षेत्रों में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार सौंपने की प्रशासनिक पहल

छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम के तहत संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों और नगरीय सीमाओं के भीतर निवासरत आदिवासी समुदायों को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार सौंपने की प्रशासनिक पहल की गई है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित करही, बरोली और बहीगांव सहित पांच ग्रामसभाओं को 14,000 एकड़ वन क्षेत्र पर सामुदायिक अधिकार मान्यता पत्र दिए गए।
इसके साथ ही अचानकमार टाइगर रिजर्व और सीतानदी-उदंती क्षेत्र के कोर व बफर ज़ोन की कुल 10 ग्रामसभाओं को भी ऐसे अधिकार पत्र वितरित किए गए, जिनमें दोनों क्षेत्रों की पांच-पांच ग्रामसभाएं सम्मिलित थीं। नगरीय क्षेत्र के अंतर्गत धमतरी ज़िले की नगरी नगर पंचायत से इस व्यवस्था की शुरुआत की गई। चुरियारा, तुमबाहरा और नगरी गांवों से मिलकर बनी इस नगर पंचायत में 10,200 एकड़ वन भूमि पर सामुदायिक अधिकार दिया गया। साथ ही शहरी क्षेत्रों में नौ व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र भी बांटे गए।
शासकीय ब्योरे के अनुसार, राज्य भर के 700 गांवों को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार दिए गए, जिनमें सूरजपुर ज़िले के 150 गांव और कांकेर ज़िले के 143 गांव शामिल रहे। पूर्व में राज्य सरकार ने लगभग चार से पांच लाख परिवारों को वन अधिकार पट्टे जारी करने का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा था। इस पत्र में वन अधिकार पट्टाधारी निर्धन किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों की तर्ज पर प्रति वर्ष छह हजार के स्थान पर 12 हजार रुपये की सहायता राशि देने का आग्रह किया गया था।
आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान ने प्रदेश की 42 जनजातियों की सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक संरचना पर आधारित एक जनजातीय एटलस तैयार किया है। ओडिशा और झारखंड के बाद ऐसा दस्तावेज बनाने वाला छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य बना। इस एटलस में विशेष पिछड़ी जनजातियों, उपयोजना क्षेत्रों, प्रशासनिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थानों, आश्रम शालाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं का आधिकारिक आंकड़ा संकलित किया गया है।