छत्तीसगढ़: तेंदूपत्ता 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से खरीदेगी सरकार, मुख्यमंत्री ने दी जानकारी

छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए संग्राहकों को प्रति मानक बोरा 5500 रुपये का पारिश्रमिक दिया जाएगा। जनसंपर्क विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह जानकारी दी है कि राज्य में तेंदूपत्ता की खरीदी इसी निर्धारित पारिश्रमिक दर पर की जाएगी।
राज्य के वनांचलों में निवासरत जनजातीय समुदायों के जीवन में वनोपज और प्राकृतिक संसाधनों का विशेष स्थान रहता है। उदाहरण के रूप में, गरियाबंद के आमझर जैसे गांवों में विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के कमार आदिवासी निवासरत हैं, जिनका जीवन पारंपरिक रूप से जंगल और उससे मिलने वाली वनोपज से जुड़ा हुआ है। आमझर लगभग 70 परिवारों की आबादी वाला गांव है।
राजिम की प्रेरक संस्था के अनुसार कमार समुदाय के लोग पहले शिकार और बेवर यानी झूम खेती पर निर्भर रहते थे। बेवर खेती की पारंपरिक पद्धति में झाड़ियों को काटकर व जलाकर उसकी राख में झुनगा जैसी फसलों के बीज बोए जाते थे। शिकार पर रोक लगने के बाद अब ये लोग वनोपज एकत्र करने, बांस के बर्तन बनाने, मजदूरी और सामान्य खेती के माध्यम से अपना जीवन यापन करते हैं। यह संस्था सामुदायिक वनाधिकार, जैव विविधता और देसी बीजों की खेती के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य करती है।
सामुदायिक वन अधिकार मिलने के उपरांत स्थानीय ग्रामीण वनों की सुरक्षा, आग से बचाव और बारिश से पूर्व पौधारोपण जैसे कार्यों में संलग्न हैं। आमझर गांव के स्थानीय निवासियों के अनुसार नियमित रखवाली से जंगलों को आग से बचाने में मदद मिलती है, जिससे पेड़-पौधों के साथ वन्यजीवों का संरक्षण भी होता है।
जनसंपर्क विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, शासन स्तर पर तय की गई इस नई दर पर तेंदूपत्ता की खरीदी की व्यवस्था की जाएगी।